इथोपिया की संसद में पीएम मोदी का ऐतिहासिक संबोधन; बोले- “शेरों की भूमि में घर जैसा अहसास”
नई दिल्ली/एजेंसी न्यूज
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज इथोपियाई संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए दोनों देशों के सदियों पुराने रिश्तों को एक नई ऊंचाई दी। प्रधानमंत्री ने भारत और इथोपिया के बीच ‘रणनीतिक साझेदारी’ (Strategic Partnership) की घोषणा की, जो रक्षा, तकनीक, और अर्थव्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग का नया अध्याय लिखेगी।
भाषण की मुख्य बातें: भावनाओं और विकास का संगम
* सभ्यताओं का मिलन: पीएम मोदी ने कहा कि भारत और इथोपिया प्राचीन सभ्यताएं हैं। उन्होंने ‘लूसी’ (मानव उत्पत्ति के शुरुआती पदचिह्न) का जिक्र करते हुए कहा कि हमारी शुरुआत साझा थी, इसलिए हमारा भाग्य भी साझा होना चाहिए।
* शेरों की भूमि: प्रधानमंत्री ने इथोपिया को ‘शेरों की भूमि’ बताते हुए अपने गृह राज्य गुजरात से इसकी तुलना की और कहा, “यहाँ मुझे घर जैसा महसूस हो रहा है।”
* निशान-ए-इथोपिया: पीएम मोदी को इथोपिया के सर्वोच्च सम्मान ‘निशान ऑफ इथोपिया’ से नवाजा गया, जिसे उन्होंने 140 करोड़ भारतीयों को समर्पित किया।
रणनीतिक साझेदारी के 5 बड़े स्तंभ
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि अब दोनों देश केवल व्यापारिक भागीदार नहीं, बल्कि रणनीतिक सहयोगी हैं:
* डिजिटल क्रांति: भारत अपने ‘डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर’ (UPI और अन्य सेवाएं) के अनुभव को इथोपिया के साथ साझा करेगा। इथोपिया के विदेश मंत्रालय का डेटा सेंटर भारत विकसित कर रहा है।
* रक्षा और सुरक्षा: आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ और साइबर सुरक्षा में घनिष्ठ सहयोग।
* कृषि और खाद्य सुरक्षा: जलवायु-अनुकूल कृषि और ‘श्री अन्न’ (बाजरा/टेफ) पर साझा अनुसंधान।
* स्वास्थ्य (फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड): दवाओं और टेलीमेडिसिन के क्षेत्र में सहयोग का विस्तार।
* निवेश: भारतीय कंपनियां पहले ही इथोपिया में 5 बिलियन डॉलर का निवेश कर चुकी हैं, जिसे अब और विस्तार दिया जाएगा।
> “जब मकड़ी के जाले आपस में जुड़ जाते हैं, तो वे शेर को भी बांध सकते हैं। इसी तरह वैश्विक दक्षिण (Global South) की एकता ही भविष्य की नई विश्व व्यवस्था लिखेगी।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
ग्लोबल साउथ की बुलंद आवाज
पीएम मोदी ने अफ्रीकी संघ को G20 का स्थायी सदस्य बनाने और इथोपिया को ब्रिक्स (BRICS) में शामिल करने का उल्लेख करते हुए कहा कि अब निर्णय प्रक्रिया 1945 के ढर्रे पर नहीं, बल्कि आज की वास्तविकता पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने “अफ्रीका कौशल गुणक पहल” के जरिए 10 लाख प्रशिक्षकों को तैयार करने का भी संकल्प दोहराया।
सांस्कृतिक जुड़ाव: चाय और कॉफी की जुगलबंदी
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने बेहद हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, “मेरा चाय से लगाव जगजाहिर है, लेकिन इथोपिया की कॉफी दुनिया को आपका सबसे बड़ा उपहार है। जैसे एक कप चाय या कॉफी संवाद का जरिया है, वैसे ही हमारी दोस्ती अब और गहरी हो रही है।”


