किन्नौर-कैलाश की दुर्गम यात्रा पर मुनाफा भारी, सुरक्षा मानकों पर नहीं गंभीरता

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आवाज़ जनादेश / न्यूज़ ब्यूरो शिमला

देश की सबसे दुर्गम धार्मिक यात्राओं में एक किन्नौर कैलाश यात्रा पर मुनाफा भारी हो गया है। यात्रा में सुरक्षा मानकों पर गंभीरता नहीं दिख रही। बिना रेन कोट, छड़ी और सही ड्रेस के ट्रेकिंग करवाई जा रही है। गणेश पार्क तक कुछ श्रद्धालु या ट्रैकर चप्पल पहनकर भी यात्रा करते दिखे। यहां तक कि कुछ बाहरी टूअर एंड ट्रैवल एजेंट युवाओं को ट्रैकिंग करवाने के लिए मोटी रकम वसूल रहे हैं। हालांकि, सीधे तौर पर प्रशासन यात्रा संचालित नहीं करता, लेकिन यात्रियों की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा है। सिर्फ पंचायत समिति और एक एडवाइजरी के भरोसे तीन दिन की इतनी कठिन यात्रा को संचालित नहीं किया जा सकता।

ऑक्सीजन की कमी भी एक चुनौती है। बुधवार को हरियाणा के तीन लोगों को सांस की दिक्कत हुई तो उन्हें ऑक्सीजन दी गई। संकरे रास्तों पर गहरी खाइयां यात्रियों की परीक्षा ले रही हैं, फिर चट्टाननुमा पत्थरों के बीच से होकर गुजरते हुए ऊंची चोटियों का पार करने की चुनौती है। जरा सा ध्यान हटा और आफत में जान। ऐसे में यात्रियों का बिना उचित सुरक्षा इंतजामों के कैलाश पर्वत की ओर जाना मुसीबत को बुलावा है। कुछ यात्री बिना छड़ी या डंडे के पहाड़ चढ़ रहे हैं, लेकिन उतराई में चल नहीं पा रहे। कोई बिना रेट कोट पहने छाता लेकर यात्रा कर रहे हैं। यहां तक कि गणेश पार्क के आगे हाड़ कंपा देने वाली सर्दी में कई श्रद्धालु निक्कर-टीशर्ट पहन ट्रैकिंग कर रहे हैं। कोई रोकने वाला नहीं। मुंबई के 14 लोगों का एक ग्रुप 10 हजार रुपये प्रति व्यक्ति कुल्लू के किसी ट्रैवल एजेंट के माध्यम से यात्रा करने पहुंचा।

गणेश पार्क से रात दो बजे श्रद्धालु शुरू में ही संकरे जानलेवा रास्ते से गुजरते हैं। इसके बाद किन्नर-कैलाश नाला और फिर ग्लेशियर है। यहां से निकले तो गणेश गुफा से सीधी चढ़ाई है जो पार्वती कुंड तक करीब तीन किलोमीटर तक बड़े-बड़े पत्थरों की राह है। पार्वती कुंड से सामने ग्लेशियर सुकून देते हैं तो बड़े-बड़े पत्थरों की राह परीक्षा लेती है। हालांकि, असली परीक्षा पार्वती कुंड से होती है। सीधी चढ़ाई जो लगातार बढ़ती है और किन्नौर-कैलाश शिवलिंग तक सफर और कठिन हो जाता है।

बेस कैंप से 898 यात्री तीन दिन में गए, आधे ही पहुंचे किन्नौर-कैलाश

तीन दिन में करीब 898 यात्री किन्नौर कैलाश के लिए बेस कैंप तामलिंग से निकले, लेकिन आधे ही गणेश पार्क से कैलाश पर्वत गए। यही बताता है कि यात्रा कितनी दुर्गम है।

गणेश पार्क से रात दो बजे श्रद्धालु शुरू में ही संकरे जानलेवा रास्ते से गुजरते हैं। इसके बाद किन्नर-कैलाश नाला और फिर ग्लेशियर है। यहां से निकले तो गणेश गुफा से सीधी चढ़ाई है जो पार्वती कुंड तक करीब तीन किलोमीटर तक बड़े-बड़े पत्थरों की राह है। पार्वती कुंड से सामने ग्लेशियर सुकून देते हैं तो बड़े-बड़े पत्थरों की राह परीक्षा लेती है। हालांकि, असली परीक्षा पार्वती कुंड से होती है। सीधी चढ़ाई जो लगातार बढ़ती है और किन्नौर-कैलाश शिवलिंग तक सफर और कठिन हो जाता है।

बेस कैंप से 898 यात्री तीन दिन में गए, आधे ही पहुंचे किन्नौर-कैलाश

तीन दिन में करीब 898 यात्री किन्नौर कैलाश के लिए बेस कैंप तामलिंग से निकले, लेकिन आधे ही गणेश पार्क से कैलाश पर्वत गए। यही बताता है कि यात्रा कितनी दुर्गम है।

सुरक्षा मानकों की एसडीएम, डीएफओ कर रहे निगरानी

उपायुक्त किन्नौर अमित कुमार शर्मा ने बताया कि यात्रा को सीधे तौर पर जिला प्रशासन नहीं, बल्कि तामलिंग पंचायत की समिति नियंत्रित करती है। बेस कैंप में प्रशासन की एडवाइजरी है, जिसमें सभी हिदायतें हैं। ग्लेशियर के पास क्यूआरटी रेस्क्यू के लिए है। ऑक्सीजन कंसंट्रेटर लगाया है। टूअर-ट्रैवल एजेंटों को लेकर निर्देश दिए जाएंगे।

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