साहित्यकार बेदी
दोस्तो यह साल तो बीत रहा है और मैं इसे किक आउट कर रहा हूं। इस साल मैंने तीन संकल्प लिए थे और तीनों ही संकल्पों पर राहु-केतु की बुरी नजर लग गई। एक भी संकल्प पूरा नहीं हो पाया। फालतू फंड में पूरा साल बीत गया। मेरी आत्मा मुझे धिक्कार रही है कि कैसे बंदे हो, अपना संकल्प पूरा नहीं कर पाए। मैं अपनी अंतरआत्मा से नजर नहीं मिला पा रहा। वैसे नजर तो मैं कई बार अपनी पत्नी से भी नहीं मिला पाता। खासकर जब मैं रात को लेट घर आता हूं तो मैं इधर-उधर देखते हुए चुपचाप बिस्तरे में घुस जाता हूं और ऊपर से चादर ओढ़ लेता हूं। फिर पत्नी की घूरती हुई आंखें मुझे दिखाई नहीं देती और मैं सुकून महसूस करता हूं। खैर बात अंतरआत्मा की हो रही थी कि मैं उससे नजर नहीं मिल पा रहा। क्यों नहीं मिला पा रहा और कौन से मेरे ऐसे संकल्प थे जो पूरे नहीं हुए, इस बारे में दुनिया को बताना जरूरी समझता हूं। आपको बताने के साथ-साथ फिर से संकल्प ले रहा हूं कि नए साल में अपने संकल्प पूरे करके रहूंगा। इस जाते हुए साल में जो तीन संकल्प लिए थे, उनमें पहला संकल्प था कि अपने विरोधी की डिबरी टाइट करके रख दूंगा। उसकी खटिया खड़ी कर दूंगा। उसकी कुर्सी हिला दूंगा। उसके पाए उखाड़ फेंकुंगा। उसके पीछे ईडी और सीबीआई जैसी एजेंसियां लगा दूंगा। उसके सारे कारनामे उजागर कर दूंगा। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। एजेंसियां अभी तक तफ्तीश में उलझी हैं और संकल्प की आउटपुट जीरो है। दूसरा संकल्प यह था कि इस साल अपनी छत ऊपर से खोल दूंगा और दुनिया को बताऊंगा कि देखो, कैसे छप्पर फाड़ कर धन आया है। दुनिया के बड़े-बड़े खरबपति भी फोन लगाकर मुझसे पूछेंगे कि धन की इतनी बरसात कैसे हो गई। लेकिन यह संकल्प भी पूरा नहीं हुआ। जिन लोगों के मैंने दो नंबर के काम करवाए थे और जिन काले कारनामे करने वालों का मैंने काला धन गोरा करवाया था, उन्होंने फूटी कोड़ी भी नहीं दी और उधर बेकार में मैंने अपने घर की छत तोड़ डाली। तीसरा संकल्प था कि खानदान का नाम रोशन करूंगा। लेकिन इधर खानदान का ही एक सज्जन अफीम बेचता पकड़ा गया और उसका नाम रोशन हो गया। मैं देखता रह गया। इस बार फिर से नया साल आया है। मैंने फिर से संकल्प लिया है।
यह संकल्प थोड़ा लीक से हटकर है। पहला संकल्प यह है कि अपने विरोधी को पहले मित्र बनाऊंगा और फिर मौका लगते ही उसे लंगड़ी लगा दूंगा। वह चारों खाने चित्त हो जाएगा। और अपना रास्ता आसान हो जाएगा। रास्ते ऐसे ही बनाए जाते हैं। दूसरा संकल्प भी थोड़ा तगड़ा है। मैंने ठान लिया है कि अपने ऑफिस के बॉस को खुश रखूंगा। खुश रखने के लिए उनकी हर बात पर ‘वाह सर, क्या दिमाग पाया है आपने!’ कहना शुरू कर दूंगा। यहां तक कि उन्होंने चाय में चीनी डालने की जगह नमक डाल दिया, तो मैं इसे भी इनोवेशन कहकर उनकी तारीफ के पुल बांधूंगा। उनसे सरकार को अपनी प्रमोशन की सिफारिश करवाऊंगा। जैसे ही बॉस रिटायर होंगे, उनके पीछे वाले कमरे को मैं अपना बना लूंगा। और उनके कुर्सी छोड़ते ही उस पर बैठकर ऐसा स्टाइल मारूंगा, जैसे इस कुर्सी के साथ मेरा सात जन्मों का रिश्ता हो। तीसरा और सबसे अहम संकल्प है कि मैं समाज सेवकों की कतार में शामिल हो जाऊंगा। कभी-कभी किसी गरीब की थोड़ी बहुत मदद करके अखबार में यह स्टोरी प्लांट करवा दिया करूंगा कि मैं गरीबों के लिए मसीहा बन गया हूं। इससे मेरा मानवीय पक्ष उजागर होगा। मेरी फैन फॉलोइंग बढ़ेगी। दुनिया मुझे बहुत इज्जत से देखेगी और फिर मैं राजनीति में आ जाऊंगा। राजनीति में आकर पिछले सारे जन्मों के पाप धुल जाते हैं। अगले जन्म संवर जाते हैं। तो दोस्तो, यह थे मेरे नए साल के संकल्प। आप उनके पूरे होने की दुआ कीजिएगा। आपको नया साल मुबारक हो। संकल्प पूरे होते ही मिलेंगे।


