अगर हम बात करें असल मुद्दों की, जो हिमाचल के भोले-भाले लोगों से सरोकार रखते हैं, तो हिमाचल के दूरदराज के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं की जरूरत है, लेकिन भाजपा इन पर कोई ठोस कदम उठाने की बजाय फालतू विवादों को हवा दे रही है। राज्य की जनता के असली मुद्दों को नजरअंदाज कर भाजपा सिर्फ राजनीति का खेल, खेल रही है। आज हिमाचल जैसे छोटे राज्यों के सामने सबसे बड़ी समस्या साधन जुटाना है। सरकार एवं विपक्ष को इस पर विचार करना चाहिए। सवाल यह है कि कब तक हम केंद्र और ऋणों के सहारे राज्य चलाते रहेंगे। विपक्ष को अपनी भूमिका स्पष्ट करनी चाहिए कि वह प्रदेश हित में काम कर रहा है या नहीं…
हिमाचल प्रदेश अपने शांत एवं स्वच्छ वातावरण के लिए जाना जाता है। हिमाचल की राजनीति सौम्यता व गंभीरता के लिए प्रख्यात है। पिछले कुछ समय से विपक्ष मीट और समोसे की राजनीति में फंसा हुआ नजर आ रहा है। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा आयोजित एक डिनर पार्टी में जंगली मुर्गे का मीट परोसे जाने को लेकर एक नया विवाद उभरा है।
इस घटना के बाद भाजपा ने मुख्यमंत्री से माफी की मांग की है, दावा करते हुए कि यह हिमाचल की सांस्कृतिक और धार्मिक भावनाओं के खिलाफ है। हालांकि, यह विवाद कोई वास्तविक मुद्दा नहीं है, बल्कि एक राजनीतिक शोरगुल का हिस्सा भर है, जो केवल ध्यान भटकाने का एक तरीका बन गया है। मुख्यमंत्री सुक्खू का डिनर था, जिसमें राज्य के अधिकारियों और नेताओं को आमंत्रित किया गया था। इस भोज में देशी मुर्गे का मीट परोसा गया और जैसे ही यह बात सामने आई, भाजपा ने इसे एक धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दा बना दिया। भाजपा नेताओं का आरोप है कि यह कदम जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए उठाया गया। उनका यह कहना कि हिमाचल एक हिंदू बहुल राज्य है, और ऐसे भोज से धार्मिक मान्यताओं को ठेस पहुंची है, बेहद अतिरंजित और निराधार है। इस मुद्दे को उठाते हुए भारतीय जनता पार्टी ने यह भी दावा किया है कि ‘जंगली मुर्गा’ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 और वन्यजीव (संरक्षण) संशोधन अधिनियम 2022 की अनुसूची एक के तहत एक लुप्तप्राय प्रजाति है और इसका शिकार करना एवं खाना अवैध है।
इस विवाद पर जवाब देते हुए सीएम सुक्खू ने कहा कि बीजेपी इसको बिना वजह मुद्दा बना रही है। सीएम ने अपनी सफाई में कहा कि मांसाहारी खाना गांवों में जीवन का एक तरीका है। मैं तेलयुक्त भोजन और नॉनवेज खाता नहीं। यह आरोप लगाकर बीजेपी ग्रामीणों का अपमान कर रही है। कुछ दिन पहले कुपवी के टिक्कर गांव में ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और अन्य अतिथियों के लिए रात्रि भोज रखा। इस रात्रि भोज के दौरान सीएम सुखविंद्र सिंह सुक्खू और अन्य लोगों के बीच बातचीत का एक कथित वीडियो और मेन्यू सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इसी को आधार बनाकर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर सहित कई अन्य नेताओं ने इसे मुद्दा बना लिया है। हालांकि, इस पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि भाजपा के नेताओं ने इससे गांववासियों को बदनाम करने का रास्ता चुना। विपक्ष के नेताओं के पास अब कोई मुद्दा नहीं है। पहाड़ के जीवन में नॉन वेज भोजन है। इससे ग्रामीणों की छवि खराब हो रही है। हालांकि यहां एक बात कहनी होगी की चीफ मिनिस्टर को भी बोलते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए जिससे कि बिना मतलब की कंट्रोवरसी क्रिएट न हो। इस विवाद को लेकर भाजपा की तरफ से सख्त बयान आए हैं, जिसमें मुख्यमंत्री से माफी की मांग की गई है। भाजपा ने इसे हिमाचल की पारंपरिक संस्कृति के खिलाफ बताते हुए माफी की बात की। क्या यह वास्तव में एक गंभीर मुद्दा है या फिर भाजपा का यह आरोप राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए उठाया गया कदम है?
विधानसभा सत्र के दौरान जब बीजेपी विधायक मुर्गे लगी प्लाकाड्र्स लेकर कुकड़ूकुं की आवाजें निकाल रहे थे, वह सच में राजीतिक मूल्यों और मुद्दों को भुलाकर प्रदेश बीजेपी का दिवालियापन दिखाता है। असल में ये दोनों ही मुद्दे इतनी छोटी बातें हैं कि इन पर बहस करने से प्रदेश की जनता के असल मुद्दों से ध्यान हटता है। सही होता अगर विपक्ष रोजगार, गेस्ट टीचर भर्ती और महंगाई के मुद्दे प्राथमिकता से उठाता। इसके अलावा अगर हम बात करें असल मुद्दों की, जो हिमाचल के भोले-भाले लोगों से सरोकार रखते हैं, तो हिमाचल के दूरदराज के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं की जरूरत है, लेकिन भाजपा इन पर कोई ठोस कदम उठाने की बजाय फालतू विवादों को हवा दे रही है। राज्य की जनता के असली मुद्दों को नजरअंदाज कर भाजपा सिर्फ राजनीति का खेल, खेल रही है। आज हिमाचल जैसे छोटे राज्यों के सामने सबसे बड़ी समस्या साधन जुटाना है। सरकार एवं विपक्ष को इस पर विचार करना चाहिए।
सवाल यह है कि कब तक हम केंद्र और ऋणों के सहारे राज्य चलाते रहेंगे। विपक्ष को अपनी भूमिका स्पष्ट करनी चाहिए कि वह प्रदेश हित में काम कर रहा है? कभी परिवहन की बसों में अतिरिक्त सामान को ले जाकर कटे टिकट पर हो हल्ला, कभी समोसे, तो कभी मुर्गे पर शोर मचाना विपक्ष की भूमिका नहीं है। विपक्ष को संविधान के दायरे में रह कर जनहित के मुद्दों को विधानसभा और जनता के बीच उठाना होता है। केवल मीडिया में बने रहने के लिए मुर्गे और समोसे जैसे मुद्दों से बचना चाहिए। विपक्ष को एजेंडा केवल और केवल कॉमन लोगों और जिससे प्रदेश का विकास हो, उन बातों पर सेट करना चाहिए। अब समय आ गया है कि हिमाचल प्रदेश की राजनीति को असल मुद्दों के साथ आगे बढ़ाया जाए, न कि सस्ती राजनीति और बेमुद्दा विवादों से। जनहित के मसले गौण नहीं होने चाहिए।


