एआईएमआईएम के दिल्ली अध्यक्ष डाॅ. शोएब जमई ने शिमला पहुंचकर संजौली मस्जिद का दाैरा लिया
आवाज जनादेश / न्यूज ब्यूरो शिमला
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के संजाैली मस्जिद विवाद में अब एआईएमआईएम नेता की एंट्री हुई है। एआईएमआईएम के दिल्ली अध्यक्ष डाॅ. शोएब जमई ने शिमला पहुंचकर संजौली मस्जिद का दाैरा लिया। इस दाैरान उन्होंने इस संबंध में अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट डाली। इसमें लिखा-शिमला की संजौली मस्जिद के आसपास जितनी भी बिल्डिंग है, सब के ऊपर अवैध निर्माण हुआ है। उन सब की ऊंचाई मस्जिद की हाइट से ज्यादा है। शिमला नगर निगम ने खुद 7000 अवैध निर्माण चिन्हित किया था। क्या सब पर बुलडोजर चलेगा या सिर्फ मस्जिद को निशाना बनाया गया। इस वीडियो में लाइव सबूत है। इसलिए हमारी टीम ने फैसला किया है कि हम हिमाचल हाईकोर्ट में पीआईएल करेंगे, ताकि सभी 7000 अवैध निर्माण पर भी बुलडोजर चलाने का आर्डर जारी हो। उधर, जामा मस्जिद संजौली के इमाम मोहम्मद शहजाद ने कहा कि हम एआईएमआईएम नेता के बयान का खंडन करते हैं। स्थानीय समुदाय अपने पहले लिए गए फैसले पर कायम है।
शोएब जमई ने एक और पोस्ट में ये लिखा
शोएब जमई ने एक और पोस्ट में लिखा- 1940 और 1960 के सरकारी दस्तावेज में (वक्फ) मस्जिद का सुबूत। 100 साल पुरानी मस्जिद की जर्जर हालत होने के बाद दोबारा से बनाया गया था। यह शिमला संजौली मस्जिद का कानूनी दस्तावेज है जिसे मैंने जनहित याचिका के उद्देश्य से मस्जिद समिति से प्राप्त किया है। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि यह मूल रूप से 1940 (1914) में अहले इस्लाम मुस्लिम वेलफेयर सोसाइटी (वक्फ द्वारा पंजीकृत) के लिए वक्फ थी और 1960 के भूमि पंजीकरण अधिनियम (खसरा-खतौनी) में (अहले इस्लाम) वक्फ संपत्तियों के तहत इसका दस्तावेजीकरण भी किया गया है। पहले इसे एकीकृत पंजाब वक्फ बोर्ड द्वारा प्रशासित किया जाता था। बाद में कानून के अनुसार अलग हिमाचल प्रदेश वक्फ बोर्ड का गठन किया गया। फिर कांग्रेस के मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने विधानसभा में झूठ क्यों बोला कि मस्जिद की जमीन सरकारी संपत्ति है? क्या कांग्रेस हाईकमान इस मंत्री पर गलत सूचना फैलाने के लिए कार्रवाई करेगा?


