देवभूमि संघर्ष समिति का आरोप; प्रदर्शन करने के लिए प्रशासन से मांगी थी अनुमति
समिति का तर्क, नगर निगम कोर्ट को नहीं देनी चाहिए थी केस में लंबी डेट
आवाज जनादेश/न्यूज ब्यूरो शिमला
देवभूमि संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने संजौली मस्जिद विवाद मामले में प्रदर्शनकारियों पर किए गए लाठीचार्ज की निंदा की है। देवभूमि संघर्ष समिति के पदाधिकारियों में संजौली इकाई के जिला संयोजक केशव चौहान ने पे्रस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि संजौली मस्जिद विवाद में किसी राजनीतिक दल का योगदान नहीं था। संजौली में प्रदर्शन करने के लिए प्रशासन से अनुमति मांगी गई थी, लेकिन प्रशासन के अधिकारियों ने अनुमति नहीं दी। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन ने आनन फानन में धारा 163 लगा दी। रात को संजौली में फ्लैग मार्च किया गया, ताकि लोगों को डराया जा सके। इससे लोगों में आक्रोश था। केशव चौहान ने कहा कि पुलिस ने उनके बहुत से लोगों को पहले से पकड़ लिया था। उन्होंने कहा कि हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने निहत्थी भीड़ पर लाठियां बरसाईं। उन्होंने कहा कि इस संवेदनशील मामले में एमसी कोर्ट में एक माह की लंबी डेट दी गई है। देव भूमि संघर्ष समीति ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि विवादित मस्जिद की जांच की जाए। इसके अलावा प्रदेश में आने वाले प्रवासियों की आईडी भी चैक करें। उन्होंने कहा कि बाहरी राज्यों से आए लोगों ने मल्याणा के अलावा कुछ समय पहले लक्कड़ बाजार में भी एक व्यापारी का सिर फोड़ा था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि हमारा विरोध विशेष समुदाय से नहीं है, लेकिन मस्जिदें पनाहगार बन रही हैं। इसके अलावा शहर में कई तहबाजारी बैठें हैं, जिनमें अधिकतर लोगों की कोई पहचान नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में डेमोग्राफी चेंज करने का प्रयास हो रहा है। ऐसे लोगों पर कार्रवाई करनी चाहिए। वहीं, देवभूमि संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष सुंदर सिंह नैहरैईक ने कहा कि 13 सितंबर को लाठीचार्ज के मामले को लेकर प्रदेश के राज्यपाल से मिलेंगे। उन्होंने कहा कि देवभूमि संघर्ष समिति सभी संगठनों के बात करके दो से तीन दिन में ग्राम से लेकर प्रदेश स्तर तक लोगों को जागरूक करने के लिए आंदोलन की रणनीति बनाएगी। वहीं, देवभूमि संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि हमने सनातन के हितों के लिए आवाज उठाई है। जमात के लोग प्रदेश में माहौल खराब कर रहे हैं।


