महाराष्ट्र की राजनीति उस समय गहरे सदमे में चली गई, जब उपमुख्यमंत्री अजित पवार को ले जा रहा विमान बारामती के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में अजित पवार समेत सभी यात्रियों की मौत हो गई। यह सिर्फ एक बड़ा राजनीतिक नुकसान नहीं है, बल्कि सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के लिए एक ऐसा झटका है, जिससे उभरना आसान नहीं होगा। महाराष्ट्र में मौजूदा महायुति सरकार 2022 में बनी थी, जब एकनाथ शिंदे ने शिवसेना तोड़कर उद्धव ठाकरे की सरकार गिरा दी और मुख्यमंत्री बने। इसके एक साल बाद अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार की एनसीपी को विभाजित कर महायुति में शामिल होकर सरकार को और मजबूती दी।
अजित पवार की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि उनकी एनसीपी का भविष्य क्या होगा। विधानसभा और नगर निगम चुनावों में अजित पवार गुट ने शरद पवार गुट से बेहतर प्रदर्शन किया था और खुद को असली एनसीपी के रूप में स्थापित किया था।
अगर दोनों एनसीपी का विलय होता है, तो नेतृत्व को लेकर संघर्ष तेज हो सकता है। शरद पवार अपनी बेटी और सांसद सुप्रिया सुले को आगे लाना चाह सकते हैं, लेकिन अजित पवार गुट के कई नेताओं को यह मंज़ूर नहीं हो सकता।
अजित पवार गुट में अब सुनील तटकरे, प्रफुल्ल पटेल और सुनेत्रा पवार जैसे नेता प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। वहीं अजित पवार के बेटे पार्थ पवार का राजनीतिक भविष्य पहले ही कमजोर माना जा रहा है।


