आवाज़ जनादेश / न्यूज़ ब्यूरो शिमला
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रारंभिक शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के निलंबन मामले में सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने निलंबित कर्मचारियों के मुख्यालय को उनके आखिरी तैनाती वाले स्कूल में बहाल करने के अंतरिम आदेश जारी किए हैं। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने आदेश दिए हैं कि अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ताओं का मुख्यालय वही स्कूल होगा, जहां उन्हें निलंबन के समय अंतिम बार तैनात किया गया था। राज्य सरकार को इस मामले में तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 24 जून को होगी। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के कारण उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है।
याचिकाकर्ताओं ने निलंबन अवधि के दौरान उनके मुख्यालय को उनके आखिरी पोस्टिंग वाले स्थान पर बनाए रखने के लिए अंतरिम सुरक्षा की मांग की थी। कोर्ट ने इस मांग को स्वीकार किया। अतिरिक्त महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर अपील खारिज कर दी गई है। स्कूल शिक्षा निदेशक के सेवा नियमों और याचिकाकर्ताओं के आचरण को ध्यान में रखते हुए निलंबन आदेश की समीक्षा करने का निर्देश दिया गया है। अदालत ने कहा कि मामले को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाने के बजाय राज्य सरकार अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने की मंशा रख रही है। निलंबन आदेश की 90 दिनों की अवधि समाप्त होने से पहले समीक्षा की जानी चाहिए। यदि आरोपपत्र जारी नहीं किया जाता है तो निलंबन की अवधि 270 दिनों से अधिक नहीं होनी चाहिए।
सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को मिलेगा डेढ़ लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार
हिमाचल प्रदेश में सड़क दुर्घटना के किसी भी पीड़ित को डेढ़ लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार दिया जाएगा। इसके लिए अस्पतालों को सूचीबद्ध किया जाएगा। दुर्घटना की तारीख से अधिकतम सात दिनों तक पीड़ित का ऐसे अस्पतालों में कैशलेस इलाज होगा। 11 जून को इस संबंध केंद्रीय परिवहन मंत्रालय के सचिव ने एक वर्चुअल बैठक बुलाई है। इसमें अतिरिक्त मुख्य सचिव परिवहन आरडी नजीम शामिल होंगे। इसमें हिमाचल से पूछा जाएगा कि यह योजना को पायलट आधार पर लागू करने के लिए कितना तैयार है। इस योजना को राज्य स्वास्थ्य सलाहकार परिषद के माध्यम से लागू किया जाना है। सड़क दुर्घटनाओं के कारण होने वाली मौतों को कम करने के लिए केंद्र सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ओर से योजना लागू की गई है। वर्तमान में यूटी चंडीगढ़, पुंडुचेरी आदि में इस योजना को लागू किया गया है। अब पायलट कार्यक्रम के तहत इसे हिमाचल और मध्य प्रदेश में लागू किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का क्रियान्वयन राष्ट्रीय स्वास्थ्य अथॉरिटी की ओर से स्थानीय पुलिस, राज्य स्वास्थ्य एजेंसी, पैनलबद्ध अस्पतालों के समन्वय से किया जाएगा।


