आवाज़ जनादेश / न्यूज़ ब्यूरो शिमला
प्रदेश की जेलों में बंद कैदियों द्वारा कारगार में निर्मित उत्पाद देश के हर कौने में मिलेंगे। इसके लिए जेल विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। महानिदेशक प्रदेश कारागार एवं सुधारात्मक सेवाएं विभाग संजीव रंजन ओझा ने बताया कि कैदियों द्वारा कारगार में निर्मित उत्पादों की बिक्री ऑनलाइन की जाएगी। इसके लिए ग्रामीण विकास विभाग के हिमईरा के ऑनलाइन पोर्टल से कैदियों के उत्पादों को बेचा जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए जेल विभाग जल्द ही ग्रामीण विकास विभाग से टाइअप करेगा। शिमला के माल रोड पर गेटी थियेटर में गुरुवार को महानिदेशक प्रदेश कारागार एवं सुधारात्मक सेवाएं विभाग संजीव रंजन ओझा ने शिमला में कैदियों द्वारा कारगार में निर्मित उत्पादों की चार दिवसीय प्रदर्शनी व बिक्री के शुभारंभ किया। इस अवसर पर उनके साथ डीआईजी जेल अनुपम शर्मा, जय गोपाल, सुरेंद्र, संजीव सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि हर हाथ को काम पहल के साथ हिमाचल प्रदेश के कारागारों में कैदियों को तराश कर समाज से जोडऩे का मौका दिया रहा है। कैदियों को कारागार के भीतर लकड़ी की कारीगरी, बेकरी के उत्पाद, शॉल-टोपी बनाने सहित अन्य काम सिखाया जा रहा है, ताकि सजायाफ्ता कैदी मानसिक तनाव से बचने के साथ-साथ आत्मनिर्भर हो सके। डीजीपी संजीव रंजन ओझा ने कहा कि प्रदेश की जेलों में लगभग 2800 के लगभग कैदी हैं, जो कुछ अंडर ट्रायल हैं, जबकि कुछ सजायाफ्ता हैं। उन्होंने कहा कि जेल में आने के बाद कई बार कैदी मानसिक तनाव से ग्रस्त हो जाता है और आजकल एनडीपीएस के मामले में युवा जेल में आ रहे हैं।
हर हाथ को काम
डीजीपी संजीव रंजन ओझा ने कहा कि आने वाले समय में अंडर ट्रायल मामलों में जेलों में बंद कैदियों को भी हर हाथ को काम के तहत काम दिया जाएगा, इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कैदी स्किल सिखकर भी कैदी कमा सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी में कैदियों द्वारा कारगार में निर्मित उत्पाद बाजार से कम कीमतों और बेहतर क्वालटी के उत्पादों की बिक्री की जा रही है। डीजीपी संजीव रंजन ओझा ने कहा कि प्रदेश के जेलों में 500 कंडा जेल, कैथू जेल में 250 और नाहन जेल में 400 लोग हैं। कोई फनीचर, तो काई बेकरी और कई लोग उनी बस्त्र बना रहे हैं।


