CM सुक्खू बोले, स्वास्थ्य क्षेत्र पर 1570 करोड़ खर्चेगी सरकार

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आवाज़ जनादेश / न्यूज़ ब्यूरो शिमला

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार को यहां स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र का कायाकल्प करने की दिशा में काम कर रही है। प्रदेश के लोगों के स्वास्थ्य लाभ के लिए अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों और मशीनरी की खरीद पर लगभग 1,570 करोड़ रुपए की धन राशि व्यय की जाएगी। सुक्खू ने कहा कि चिकित्सा महाविद्यालयों को न्यूरोलॉजी, ओन्कोलॉजी, ऑर्थोपैडिक्स और अन्य विभागों में रॉबोटिक सर्जरी की सुविधा के साथ स्तरोन्नत किया जा रहा है। इससे चिकित्सकों का कार्यभार कम होगा और उपचाराधीन मरीज भी लाभान्वित होंगे। उन्होंने कहा कि आईजीएमसी शिमला और डा. राजेंद्र प्रसाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय टांडा में अत्याधुनिक पैट स्कैन और एमआरआई मशीनें स्थापित करने की प्रक्रिया चल रही है और इसे शीघ्र ही जनता को समर्पित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि डा. राधाकृष्णन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय हमीरपुर में 300 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त कैंसर केयर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी स्थापित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसमें राज्य की पहली साइकलोट्रॉन मशीन के साथ रेडिएशन और न्यूक्लियर मेडिसिन थैरेपी की सुविधा भी उपलब्ध होगी। इस केंद्र में कैंसर के मरीजों के लिए 150 बिस्तरों की सुविधा भी होगी।

बैठक में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डा.(कर्नल) धनी राम शांडिल, विधायक संजय अवस्थी, अजय सोलंकी, सचिव स्वास्थ्य एम.सुधा देवी, विशेष सचिव स्वास्थ्य डा. अश्वनी शर्मा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने इन अस्पतालों में स्पेशिएलिटी बैड और 69 स्वास्थ्य सुविधाओं के उन्नयन और सुदृढ़ीकरण के निर्देश दिए, ताकि मरीजों को राज्य में गुणवत्तायुक्त उपचार सुविधा मिल सके। इससे सेकेंडरी केयर, आपातकालीन सेवाएं, उपकरण सुविधाएं व सुरक्षा मापदंड, अग्निशमन अधोसंरचना और आतंरिक गतिशीलता में सुधार सहित अन्य स्वास्थ्य सुविधाएं भी सुदृढ़ होंगी। उपचार सुविधाएं बढ़ाने के लिए जोनल अस्पताल, क्षेत्रीय व जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में इन-हाउस लैबोरेटरी स्थापित करने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा। कार्य योजना के तहत जोनल और सिविल अस्पतालों में मॉडयूलर ऑपरेशन थियेटर स्थापित किए जाएंगे। प्रदेश सरकार के इन प्रयासों के फलस्वरूप मरीजों को उपचार के लिए प्रदेश से बाहर नहीं जाना पड़ेगा और राज्य में मेडिकल टूरिज्म को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

हर साल 9.50 लाख मरीज प्रदेश से बाहर करवा रहे इलाज

सीएम ने कहा कि बीमारी जांच और उपचार के लिए प्रतिवर्ष 9.50 लाख मरीज प्रदेश से बाहर जाते हैं,जिससे सकल घरेलू उत्पाद में 1,350 करोड़ रुपए का नुकसान होता है। यह एक गंभीर विषय है और वर्तमान प्रदेश सरकार मरीजों को सर्वसुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने और उनके बहुमूल्य धन और समय की बचत के लिए राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की अधोसंरचना को मजबूत करने पर प्राथमिकता से कार्य कर रही है।

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