संजौली मस्जिद गिराने के फैसले को चुनौती

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आवाज़ जनादेश / न्यूज़ ब्यूरो शिमला

संजौली में मस्जिद में हुए अवैध निर्माण के मामले में नया ट्विस्ट आ गया है। मुस्लिम पक्ष के दूसरे धड़े ने इस मस्जिद को गिराने के नगर निगम आयुक्त के फैसले को कोर्ट में चुनौती दी है। इसमें तर्क दिया है कि जिस मस्जिद कमेटी ने अवैध निर्माण खुद हटाने का ऑफर किया था, वह अवैध है। मस्जिद में अवैध निर्माण मामले में बुधवार को जिला कोर्ट चक्कर में सुनवाई हुई। ऑल हिमाचल मुस्लिम ऑर्गेशनाइजेशन ने मस्जिद गिराने के नगर निगम आयुक्त के पांच अक्तूबर के फैसले पर रोक को याचिका डाली। अदालत में इसका विरोध लोकल रेजिडेंटस की ओर से पेश हुए वकील ने किया। इस पर कोर्ट ने एमसी आयुक्त से कुछ रिकार्ड मांगा और 11 नवंबर के लिए सुनवाई तय की है। उसी दिन याचिकाकर्ता के साथ-साथ लोकल रेजिडेंट और जो लोग इस केस में पार्टी बनना चाहते हैं, उन्हें भी सुना जाएगा। उसी दिन इस याचिका की मैंटेनेबेलिटी को लेकर भी फैसला होगा।

मुस्लिम संगठनों की तरफ से दायर नजाकत अली हाशमी की याचिका पर बुधवार को शिमला के अतिरिक्त जिला सत्र न्यायाधीश प्रवीण गर्ग की अदालत में सुनवाई हुई। मुस्लिम संगठनों की तरफ से याचिकाकर्ता नजाकत अली हाशमी के अधिवक्ता विश्व भूषण ने कहा कि संजौली मस्जिद मामले में एक मस्जिद कमेटी ने एमसी आयुक्त को मस्जिद गिराने के लिए लिखित में ज्ञापन दिया है, जिस आधार पर नगर निगम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है, लेकिन जिस मस्जिद कमेटी ने यह ज्ञापन दिया है, वह अवैध है। ऐसे में मस्जिद गिराने के लिए दिया ज्ञापन भी गैर कानूनी है।

नजाकत अली की याचिका का कोई औचित्य नहीं

मामले में संजौली के स्थानीय लोगों की तरफ पेश हुए अधिवक्ता जगत पाल ने कहा कि नजाकत अली की याचिका का कोई औचित्य नहीं बनता। वह न तो स्थानीय निवासी हैं और न ही इस मस्जिद का कोई हितधारक है। ऐसे में यह याचिका स्टैंड नहीं करती है। मस्जिद कमेटी ने वक्फ बोर्ड की सहमति पर मस्जिद को गिराने के लिए नगर निगम आयुक्त को ज्ञापन दिया था, जिस पर नगर निगम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है।

ऑल हिमाचल मुस्लिम ऑर्गेनाइजेशन से कोई संबंध नहीं

संजौली मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष मोहम्मद लतीफ ने बताया कि हम कोर्ट के आदेशों का सम्मान करते हैं। आयुक्त कोर्ट ने जो फैसला सुनाया था, हम उसी पर काम कर रहे हैं। मस्जिद की एटिक को हटा दिया है और काम चल रहा है। ऑल हिमाचल मुस्लिम ऑर्गेनाइजेशन से हमारा कोई संबंध नहीं है। ऐसे में इन्होंने जो स्टे की मांग की है, हम इसका विरोध करते हैं। ऐसे में जो भी कोर्ट का फैसला होगा, हमें मान्य होगा।

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