सुरंगों में होगी शिमला के इतिहास से जुड़ी पेंटिंग, पर्यटकों को टनल में गुजरते मिलेगा शिमला का इतिहास

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पुराना बस अड्डा की टनल में दिखेगा एचआरटीसी का इतिहास

आवाज जनादेश / न्यूज ब्यूरो शिमला

राजधानी शिमला की सभी टनलों को पर्यटकों के लिए आकर्षक बनाया जाना है। इसके लिए नगर निगम, लोनिवि और एचआरटीसी ने प्लान तैयार कर लिया है। इस प्लान के मुताबिक शिमला शहर की टनलों में शिमला से जुड़े इतिहास और यहां की संस्कृति की पेंटिंग बनाई जानी है। जिससे पर्यटक शिमला के इतिहास के बारे में चित्रों के माध्यम से जान सकें और पर्यटक शिमला घूमनें में ज्यादा रूची रख सके। बता दें कि पुराना बस अड्डा टनल में जल्द ही लोगों को एचआरटीसी के 50 सालों का सफर देखने को मिलेगा।

एचआरटीसी के बस अड्डा प्रबंधन एवं विकास प्राधिकरण ने इसको लेकर टनल के सौंदर्यीकरण का काम शुरू कर दिया है। ढली टनल की तर्ज पर पुराना बस अड्डा टनल को संवारने काम किया जाएगा। इसमें एचआरटीसी के शुरुआती दौर से लेकर आज की बसों और सफर को दर्शाया जाएगा। इसका मकसद लोगों को एचआरटीसी की ओर से उन्हें पांच दशकों से उपलब्ध करवाई जा रही सेवाओं के बारे में अवगत करवाना है। इससे जहां देश-विदेश से आने वाले सैलानियों के लिए यह टनल आकर्षण का केंद्र बनेगी वहीं उन्हें पहाड़ों के रोमांचक सफर के बारे में भी जानकारी मिलेगी। बस अड्डा प्रबंधन एवं विकास प्राधिकरण की ओर से इस कार्य के लिए टेंडर आवंटित करने के बाद कार्य कर दिया है। प्राधिकरण के मुताबिक दो माह में इस कार्य को पूरा करने का लक्ष्य रखा है। सौंदर्यीकरण कार्य के तहत शहर की टनलों को संवारने का काम किया जा रहा है। इसका मकसद सैलानियों के सफर को रोमांचक बनाना है। वहीं शहर की खूबसूरती में चार चांद लगाना भी है।

22 लाख में होगा सौंदर्यीकरण का कार्य

बस अड्डा प्रबंधन एवं विकास प्राधिकरण के मुताबिक टनल के सौंदर्यीकरण के कार्य पर करीब 22 लाख रुपए की राशि खर्च की जाएगी। इसका डिजाइन भी तैयार हो गया है। ढली टनल के सौंदर्यीकरण के कार्य को देखते हुए इसी कंपनी को इस कार्य का जिम्मा सौंपा है। गौरतलब है कि एचआरटीसी के स्वर्ण जयंती समारोह को लेकर बस अड्डे में खास तौर पर निगम की सबसे पहले चलने वाली बसों और अब चलने वाली आधुनिक बसों के लोगो को देखने के लिए रखे हैं।एचआरटीसी के स्वर्ण जयंती समारोह के उपलक्ष्य पर पुराना बस अड्डा टनल के सौंदर्यीकरण का काम किया जा रहा है। इसका मकसद हिमाचल पथ परिवहन के 50 सालों के सफर से लोगों को रूबरू करवाना है।

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