मशरूम की शैल्फ लाइफ बढ़ाने पर करना होगा काम

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सोलन में राष्ट्रीय मशरूम मेले में राज्यपाल ने खुंब अनुसंधान निदेशालय प्रबंधन को दिए आदेश

कहा, राष्ट्रीय मेला एक दिन के बजाय दो दिन तक चलाने का करें प्रावधान

आवज जनादेश / न्यूज ब्यूरो शिमला

मशरूम की शैल्फ लाइफ को बढ़ाने के लिए निदेशालय को कार्य करना चाहिए। यह निर्देश राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने सोलन स्थित खुंब अनुसंधान निदेशालय प्रबंधन को दिए। वे मंगलवार को निदेशालय में आयोजित 27वें राष्ट्रीय मशरूम मेले के मौके पर आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि खुंब अनुसंधान निदेशालय को मशरूम की शैल्फ लाइफ को बढ़ाने वाली तकनीक को विकसित करना चाहिए। इससे प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के किसानों को लाभ मिलेगा। साथ ही मशरूम मेला एक दिन का ही नहीं बल्कि दो दिन का होना चाहिए, ताकि मशरूम उत्पादकों को अपने अनुभव व समस्याओं को बताने का अवसर मिले सके। खुंब अनुसंधान निदेशालय मशरूम की नई-नई किस्मों को विकसित करने के लिए रिसर्च कर रहा है। राज्यपाल ने कहा कि 1970 से मशरूम का उत्पादन शुरू हुआ है। पिछले 54 वर्षों के लंबे समय में मशरूम उत्पादन में तेजी के साथ वृद्धि हुई है।

अगर दस वर्ष पूर्व देश में एक लाख टन मशरूम का उत्पादन हो रहा था, तो वह अब बढक़र 3.50 लाख टन हो गया है। मशरूम की कई किस्में है, लेकिन बटन मशरूम की पहचान सबसे अधिक है। बता दें कि सोलन में आयोजित 27वें राष्ट्र स्तरीय इस मेले मशरूम मेले में पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, तमिलनाडू, हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, मध्यप्रदेश, ओडिशा, गुजरात, चंडीगढ़, जम्मू व कश्मीर, मणिपुर सहित अन्य राज्यों के किसान भी मेले में भाग लेने के लिए पहुंचे। -एचडीएम

मुझे नहीं मालूम था मशरूम निदेशालय अनुसंधान यहां है

राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि सोलन शहर मशरूम सिटी ऑफ इंडिया के नाम से विख्यात है। मशरूम को लेकर यहां पर अनुसंधान होते हैं, लेकिन खुंब अनुसंधान निदेशालय कहां है इसकी लोगों को जानकारी कम है। मेरा स्वयं भी इस स्थान से कई मर्तबा आना-जाना हुआ है, लेकिन इसका पता नहीं चला। उन्होंने निदेशालय के निदेशक के साथ उपायुक्त सोलन को निर्देश दिए कि इस स्थान को प्रदर्शित करने के लिए एनएच पर बोर्ड का होना आवश्यक है।

एक लाख रुपए किलो मशरूम

मशरूम मेले में भी करीब एक लाख रुपए प्रति किलो बिकने वाली कोर्डिसेप्स मिलिट्रेनस (कीड़ा जड़ी) मशरूम आकर्षण का मुख्य केंद्र रही। डीएमआर द्वारा मेले में लगाई गई प्रदर्शनी में इसको विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया था। मशरूम की यह प्रजाति औषधीय गुणों से भरपूर है। इसके अतिरिक्त टर्की टेल, आर्टिफिशियल गुच्छी व मशरूम से तैयार किए गए पदार्थों की प्रदर्शनी ने भी लोगों का ध्यान खींचा।

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