16 साल बाद दोषी पाया गया पटवारी, हाई कोर्ट ने पलटा निचली अदालत का फैसला

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रिश्वतखोरी के जुर्म में हाई कोर्ट ने पलटा निचली अदालत का फैसला

आवाज जनादेश/न्यूज ब्यूरो शिमला

प्रदेश हाई कोर्ट ने रिश्वतखोरी के जुर्म में पटवारी को वारदात के 16 साल बाद दोषी ठहराया है। कोर्ट ने पटवारी को जमीन से जुड़े कुछ कागज बनाने की एवज में 1000 रुपए की रिश्वत लेने का दोषी ठहराते हुए निचली अदालत के फैसले को पलट दिया। न्यायाधीश राकेश कैंथला ने विशेष न्यायाधीश हमीरपुर के 17 अगस्त, 2010 के फैसले को कानून के विपरीत पाते हुए रद्द कर दिया। कोर्ट ने दोषी सीता राम को सजा सुनाए जाने के लिए दस सितंबर को अदालत में उपस्थित रहने के आदेश भी जारी किए। अभियोजन पक्ष के द्वारा न्यायालय के समक्ष रख तथ्यों के अनुसार शिकायत कर्ता होशियार सिंह आईटीबीपी में कार्यरत था। वह दो अक्तूबर, 2008 को अपनी दो महीनों की वार्षिक छुट्टी पर अपने गांव दलचेहड़ा आया था। उस समय उसके गांव में बंदोबस्त का काम चल रहा था।

इस दौरान उसकी भूमि की तकसीम नहीं की गई। उसने अपने वकील से इस बाबत बात की तो वकील ने कुछ जरूरी कागजात एकत्रित करने की सलाह दी ताकि तकसीम का मामला दायर किया जा सके। होशियार सिंह जमाबंदी, ततीमा जैसे कागजात बनवाने के लिए दलसेहड़ा के तत्कालीन पटवारी सीता राम से 22 अक्तूबर को मिला। पटवारी ने उसे कहा कि कागज तैयार करने का बहुत बड़ा काम है जिसके लिए उसकी पूरी रात भी लग सकती है। वह अगले दिन दोपहर 12 से एक बजे तक कागजात तैयार करके रखेगा। पटवारी ने कागज तैयार करने की एवज में 1000 रुपए रिश्वत की मांग भी की। शिकायतकर्ता ने इसे बड़ी रकम बताते हुए इनकार किया तो पटवारी ने कहा कि 1000 रुपए दिए बगैर कागज तैयार करने का काम पूरा नहीं होगा। शिकायतकर्ता रिश्वत नहीं देना चाहता था इसलिए उसने इसकी शिकायत विजिलेंस के पास की, जिसके बाद पटवारी को अगले दिन रंगे हाथों 1000 रुपए की रिश्वत के साथ विजिलेंस टीम ने पकड़ लिया। मामला विशेष न्यायाधीश हमीरपुर के समक्ष प्रस्तुत किया गया। अभियोजन पक्ष ने कुल दस गवाह पेश किए। विशेष न्यायाधीश हमीरपुर ने शिकायतकर्ता को आरोपी का सहयोगी बताते हुए उसे बरी कर दिया था।

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