पूर्व में जिस कांग्रेस सरकार ने जिन 14 नर्सिंग कॉलेजों को न मंजूर किया था वर्तमान सरकार ने उन्ही 14 नर्सिंग कॉलेजों पर वर्तमान सरकार ने मेहरवानी दिखाते हुए उन्हें खोलने की स्वीकृति दे दी है। ऐसा क्यों हुआ इसके बारे तो सरकार ही सही वजह बता सकती है। लेकिन सूत्रों के मुताबिक अधिकारियों ने सरकार के समक्ष रखा था कि “प्रदेश में नर्सो की कमी है ” । लेकिन हकीकत से अवगत न तो अधिकारियों ने करवाया और न ही भाजपा नेताओं ने। एक साथ 14 कॉलेज खोलने की मांग हिमाचल जैसे छोटे प्रदेश में कुछ समझ से परे लग रही है । अभी 24 से अधिक कॉलेज चल रहे है इनमे “जीएनएम” और “बीएससी नर्सिंग” चल रहे है । इनमे से हर साल क़रीब 3 हज़ार छात्राएं डिग्री डिप्लोमा करके निकलती है लेकिन साल में मुश्किल से 200 नर्सो को सरकार नौकरीयां दे पाती है बाकी 2800 निजी क्लीनिक या एम्बुलेंस आदि में 3 से 6 हज़ार की नौकरी करने को मजबूर है। अब 14 कॉलेज और खोलने से छात्राओं को बेरोजगार करने में मदद करेंगे। पंजाब में 100 से अधिक नर्सिंग कॉलेज खोले है लेकिन उनकी हालत कैसे है प्रदेश का हर व्यक्ति जानता है । जब जब क्वांटिटी बढ़ी है तब तब क्वालिटी घटी है। ऐसा ही हाल बीएड के साथ सरकारो ने किया है चेह्तो को फायदा देने के चक्र में हिमाचल में सरकार हाल ऐसा है की बीएड कॉलेजो हर गली गलियारे में 77 के लगभग खोल दिए मगर अध्यापको की भर्तियाँ पिछले दरवाजे से सरकारे करती आई है बात यदि नर्सिंग की की जाए तो एक डिग्री का खर्च बीएससी तक 5 लाख के करीब बनता है गरीब घर की बेटियों को बहुत ही मुश्किल से और एक आशा के साथ उनके अभिभावक खर्च कर पाते है डिग्री के बाद फिर वही डिग्रियां की कीमत निजी संस्थानों में 3-6 हजार वेतन के रूप में लगती है | 200 नर्सो की भर्ती और 3 तिन हजार का प्रशिक्षण के क्या माइने लगाए यह एक सोचने योग्य बात है | क्या इसतरह के निर्णय प्रदेश के हितो में है यह एक प्रश्न मन में उठाना सभाविक है | बीएड कालेजों की तर्ज पर अब नर्सिंग कालेजो की भी भरमार होगी जो 67 लाख की आबादी वाले इस प्रदेश के लिए शायद जरुरतो से जयादा है बीएड की हर साल सीटे खाली ही रह जाती है। जिन छात्रों ने बीएड की है उन्हें रोजगार सरकारी एरिया में देने में कोई ठोस नीति नहीं है। दिलचस्प बात तो ये है इन 14 कॉलेजो ने पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र जी की सरकार के कार्यकाल में आवेदन किया था। लेकिन वीरभद्र सिंह ने मंजूरी नहीं दी थी। हालाकि इनमें कई कांग्रेस के करीबी भी थे । फिर वीरभद्र का प्रदेश हित में सही कदम कह सकते है|
भले ही सरकार ने मंजूरी दे दी है लेकिन भगवान करे इन कॉलेजों का हश्र बीएड कॉलेजो की तरह न हो ।
प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के हाल किसी से छिपे नही है सरकारों की कमजोर नीतियों के कारण है। प्रदेश की बेटियों का सम्मान कहे या फिर बेटियों को बेरोजगार बना कर उन्हें आत्मनिर्भता से दूर करना यदि सरकार बेटियों को आत्मनिर्भ बनाना चाहती है तो उन्हें रोजगार देने की आवश्कता पर बल देना होगा तथा ऐसे निर्णय से बचाना होगा |


