
सतर्कता जांच कमेटी ने बिजली बोर्ड को घेरा, बाहरी ठेकेदारों पर ‘लूट’ का आरोप
आवाज़ जनादेश/शिमला ब्यूरो
शिमला: हिमाचल प्रदेश में आरडीएसएस (RDSS) प्रोजेक्ट और आरवीएनएल (RVNL) कंपनी को दिए गए ठेकों को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जिला सतर्कता जांच समिति (बंधुआ मजदूरी प्रणाली), शिमला ने हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड के अध्यक्ष को एक कड़ा पत्र लिखकर इस पूरे प्रोजेक्ट में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और स्थानीय हितों की अनदेखी के सनसनीखेज आरोप लगाए हैं।
कानून की धज्जियां और सरकारी धन की बर्बादी
सतर्कता जांच समिति के निदेशक पूर्ण चंद द्वारा हस्ताक्षरित इस पत्र में सीधा हमला करते हुए कहा गया है कि बिजली बोर्ड द्वारा आरवीएनएल (RVNL) को दिए गए प्रोजेक्ट में न केवल हिमाचल के पैसे का दुरुपयोग हो रहा है, बल्कि कानून की भी सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। आरोप है कि कंपनी और ठेकेदारों की मिलीभगत से प्रदेश के खजाने को चूना लगाया जा रहा है।
‘बाहरी’ ठेकेदारों का बोलबाला, स्थानीय हिमाचली हाशिए पर
पत्र में सबसे गंभीर आरोप ‘सबलेट’ ठेकेदारों को लेकर लगाया गया है। समिति का कहना है कि:
* जब प्रोजेक्ट हिमाचल का है, तो स्थानीय ठेकेदारों को प्राथमिकता क्यों नहीं दी गई?
* RVNL ने भारी संख्या में बाहरी राज्यों के ऐसे ठेकेदारों को काम पर लगा दिया है, जिन्हें हिमाचल की कठिन भौगोलिक स्थिति का ज्ञान तक नहीं है।
* इन ठेकेदारों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए पत्र में इन्हें ‘फर्जी जैसे लोग’ करार दिया गया है, जिनका न कोई स्थाई पता है और न ही कोई आधिकारिक रिकॉर्ड।
“आज ऑफिस में मिलते हैं, तो कल गायब”
सतर्कता समिति ने आरोप लगाया कि ये बाहरी ठेकेदार हिमाचल में ‘खुलेआम लूट’ मचा रहे हैं। इनकी कार्यप्रणाली इतनी संदिग्ध है कि आज ये ऑफिस में नजर आते हैं, तो अगले ही दिन इनका कोई अता-पता नहीं होता। इनके पास न तो कोई वैध पहचान पत्र है और न ही कोई फोन नंबर या ईमेल, जिससे इनसे संपर्क साधा जा सके।
रेट लिस्ट सार्वजनिक करने की मांग
पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए सतर्कता जांच समिति ने मांग की है कि:
* HPSEB द्वारा RVNL को दिए गए रेट और RVNL द्वारा आगे ठेकेदारों को दिए गए रेट की सूची तुरंत सार्वजनिक की जाए।
* समिति ने दावा किया है कि उनके पास कुछ ऐसी रेट लिस्ट मौजूद हैं जो बड़े भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती हैं।
* बाहरी राज्यों के ठेकेदारों को तुरंत हटाकर हिमाचल के स्थानीय कामगारों और ठेकेदारों को काम दिया जाए।
इस पत्र के बाद अब बिजली बोर्ड और आरवीएनएल प्रशासन कटघरे में है। सतर्कता समिति के इन कड़े तेवरों ने विभाग में हड़कंप मचा दिया है। अब देखना यह होगा कि सरकार और बिजली बोर्ड इन गंभीर आरोपों पर क्या कार्रवाई करते हैं या फिर भ्रष्टाचार का यह खेल इसी तरह पर्दे के पीछे चलता रहेगा।
RDSS प्रोजेक्ट में बड़े घोटाले की बू- पूर्ण
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