
आवाज़ जनादेश,सीटी रिपोर्ट शिमला
शिमला स्थित सिस्टर निवेदिता गवर्नमेंट नर्सिंग कॉलेज (SNGNC) ने एक अनोखी पहल करते हुए डर्माटोग्लाइफिक्स मल्टीपल इंटेलिजेंस टेस्ट (DMIT) पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया। यह कार्यशाला 27 अगस्त 2025 को हुई, जिसका उद्देश्य छात्रों को उनकी जन्मजात क्षमताओं और प्रतिभाओं को पहचानने में मदद करना था। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आदित्य शर्मा के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम का समन्वय सुश्री ज्योति वालिया ने किया।
मुख्य वक्ता ने समझाया DMIT का महत्व
कार्यशाला के मुख्य वक्ता डॉ. बी. एस. चौहान थे, जो SNGNC और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) के विजिटिंग फैकल्टी और देश के जाने-माने DMIT विशेषज्ञ हैं। उन्होंने लगभग 75 स्नातक और परास्नातक नर्सिंग छात्रों को संबोधित करते हुए बताया कि कैसे फिंगरप्रिंट का अध्ययन व्यक्ति की जन्मजात क्षमताओं का पता लगा सकता है।
डॉ. चौहान ने समझाया कि फिंगरप्रिंट्स गर्भधारण के 10-16 सप्ताह के बीच विकसित होते हैं और जीवन भर अपरिवर्तित रहते हैं। उन्होंने कहा कि यह परीक्षण हमारी संज्ञानात्मक और मनो-मोटर क्षमताओं को समझने में मदद करता है। उन्होंने बताया कि इस तकनीक का उपयोग 40 से अधिक देशों में किया जा चुका है और 200 से अधिक अध्ययनों से इसे मान्यता प्राप्त है।

16 छात्रों का DMIT परीक्षण
इस कार्यशाला में 16 छात्रों का DMIT परीक्षण भी किया गया, जिसमें उनके फिंगरप्रिंट की स्कैनिंग की गई। तकनीकी प्रक्रिया को तान्या पप्टा और आयुष दस्ता ने संभाला। इस परीक्षण में शामिल होने वाले छात्रों के नाम हैं: श्रृष्टि शर्मा, आकृति ठाकुर, अनामिका कालिया, भारती ठाकुर, प्रिया चौधरी, रेनुका, आंचल ठाकुर, नेहा ठाकुर, छवि रहाल, चंचल, रिया वर्मा, मुस्कान चौहान, अंजलि, बंधना शर्मा, शेरल बिष्ट और अंशिका जरयाल तथा नर्सिंग शिक्षा के लिए DMIT की प्रासंगिकता डॉ. चौहान ने भी इस बात पर जोर दिया कि DMIT नर्सिंग छात्रों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है। उन्होंने तीन मुख्य लाभों के बारे में बताया आत्मबोध से छात्रों को उनकी शक्तियों और कमजोरियों को समझने में मदद मिलती है तथा बेहतर क्लीनिकल लर्निंग से अपनी जन्मजात क्षमताओं के अनुसार भूमिकाएँ मिलने पर क्लीनिकल गलतियाँ 10-15% तक कम हो सकती हैं। उन्होंने अपनी प्रक्रिया को पूरा करते हुए कहा कि हमारे भीतर जो तनाव है उसमें कमी लाने के लिए DMIT-आधारित मार्गदर्शन से तनाव 15-20% तक घट सकता है, जिससे बर्नआउट (मानसिक थकान) में कमी आती है।
प्राचार्य का वक्तव्य

कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आदित्य शर्मा ने इस कार्यशाला की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह एक बेहद उपयोगी पहल है और भविष्य में इसे सभी छात्रों और फैकल्टी सदस्यों के लिए भी आयोजित किया जाएगा। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस तरह के कार्यक्रम छात्रों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
यह कार्यशाला सिर्फ एक शैक्षणिक कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि नर्सिंग शिक्षा को एक नया आयाम देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था। इस पहल से भविष्य के स्वास्थ्यकर्मियों को न सिर्फ क्लीनिकल स्किल्स में महारत हासिल होगी, बल्कि वे अपनी आंतरिक क्षमताओं को पहचानकर एक स्वस्थ और खुशहाल जीवन भी जी सकेंगे।


