पोषण अभियान में बिना खर्च किए रह गए करोड़ों रुपए, रिपोर्ट में खुलासा

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आवाज़ जनादेश / न्यूज़ ब्यूरो शिमला

हिमाचल प्रदेश में पोषण अभियान में कड़ों रुपये बिना खर्च किए रह गए। वित्तीय वर्ष 2022-23 में 83.39 लाख रुपये और 2023-24 में 11.37 करोड़ रुपए खर्च नहीं किए गए। इस पर राज्य विधानसभा की कल्याण समिति ने तल्खी दिखाई है। कल्याण समिति ने अपनी रिपोर्ट में इसका जिक्र किया है। अभियान पोषण- 2.0 का उद्देश्य छोटे बच्चों 6 वर्ष से कम आयु, किशोरियों 14-18 वर्ष, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली धात्री माताओं में कुपोषण की समस्या का समाधान करना है। इस समिति के अध्यक्ष विधायक मोहन लाल ब्राक्टा हैं, जबकि इसके 11 विधानसभा सदस्य हैं।

योजना के संचालन के लिए वित्तीय वर्ष 2022-23 में 9.47 करोड़ और 2023-24 में 34.10 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान किया। वर्ष 2022-23 में 8.64 करोड़ रुपए और 2023-24 में 22.72 करोड़ रुपए व्यय किए गए। इस पर समिति ने वित्तीय वर्ष 2022-23 व 2023-24 में बजट को पूर्ण रूप से व्यय न करने के क्या कारण जानने चाहे हैं। समिति ने यह भी जानना चाहा है कि वर्णित वित्तीय वर्षों की शेष बची धनराशि 83.39 लाख रुपए और 11.37 करोड़ रुपए की रकम को कहां-कहां खर्च किया गया और यदि यह धनराशि सरेंडर की गई तो कारण बताएं। समिति ने वित्तीय वर्ष 2022-23 की अपेक्षा वित्तीय वर्ष 2023-24 में तीन गुणा से भी अधिक बजट प्रावधान करने के कारणों से भी अवगत करवाने को कहा। विभाग ने इस पर स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया तो उससे भी समिति ने असंतोष जताया है।

योजना व्यय का 90 प्रतिशत भारत सरकार, 10 प्रतिशत राज्य सरकार वहन कर रही

पोषण अभियान को वर्ष 2017-18 में देश के कुछ चिन्हित जिलों में आरंभ किया गया। 8 मार्च 2018 को इस अभियान के प्रथम चरण में हिमाचल प्रदेश के पांच जिलों चंबा, हमीरपुर, सोलन, ऊना और शिमला का चयन किया गया। 10 दिसंबर 2018 को द्वितीय चरण में भारत सरकार की ओर से मंडी, कांगड़ा, बिलासपुर, कुल्लू, किन्नौर, लाहौल-स्पीति और सिरमौर में भी इस अभियान को शुरू करने की स्वीकृति दी। इस समय यह अभियान पूरे प्रदेश में चलाया जा रहा है। पोषण अभियान केंद्र प्रायोजित कार्यक्रम है। इस योजना में होने वाले व्यय का 90 प्रतिशत भारत सरकार और 10 प्रतिशत राज्य सरकार की ओर से वहन किया जाता है।

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