आवाज़ जनादेश / न्यूज़ ब्यूरो शिमला
नए शैक्षणिक सत्र 2025-26 में राज्य भर के स्कूलों में छात्रों को नि:शुल्क मिलने वाली किताबों व बोर्ड परीक्षाओं के सही संचालन में इस बार संकट के बादल मंडराने लगे हैं। उच्च शिक्षा निदेशालय के किताबों को तैयार करवाने के पिछले तीन वर्षों से भी अधिक समय से 38 करोड़ रुपए पेंडिंग चल रहे हैं। ऐसे में आगामी शैक्षणिक वर्ष की किताबों को तैयार करने व परीक्षाओं के संचालन व्यवस्था पर संशय बन गया है। इस बार हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड धर्मशाला के हाथ भी खड़े हो गए हैं, उन्हें किताबों की प्रिंटिंग व परीक्षाओं की पूरी तैयारियां व उत्तरपुस्तिकाओं की जांच के बिलों का भुगतान मुश्किल बन गया है। इसके चलते हिमाचल प्रदेश स्कूल स्कूल शिक्षा बोर्ड कर्मचारी संघ ने उच्च शिक्षा विभाग शिमला से बोर्ड के पेंडिंग बिलों को जल्द जमा करवाने की मांग रखी है। स्कूल शिक्षा बोर्ड धर्मशाला का कुल रुपए 37 करोड़ 96 लाख 73 हज़ार रुपए का भुगतान उच्चतर शिक्षा विभाग द्वारा पिछले तीन वर्षांे से लंबित है। बोर्ड को उच्चतर शिक्षा विभाग द्वारा लंबित राशि का भुगतान नहीं किए जाने की वजह से शिक्षा बोर्ड की वित्तीय स्थिती पर संकट आ गया है। शिक्षा बोर्ड में खराब वित्तीय स्थिति का सीधा असर बोर्ड द्वारा परीक्षा संबंधित किए जाने वाले कार्यों व अध्यापकों से करवाए जाने वाले परीक्षा से संबंधित कार्यों पर पड़ रहा है। अध्यापकों को परीक्षा से संबंधित भुगतान भी बोर्ड द्वारा किए जाने हैं, जो कि अभी तक लंबित पड़े हैं।
इस कारण शिक्षा बोर्ड द्वारा परीक्षा संचालन व परीक्षा परिणाम समय पर निकालने में मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही छात्रों को सरकार द्वारा किताबें उपलब्ध करवाई जानी है, अगर उसमें किसी प्रकार विलंब होता है, तो उसका पूर्ण दायित्व भी शिक्षा विभाग शिमला का होगा। वहीं प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुनील शर्मा व महासचिव अंकुश ने निदेशक (उच्चतर शिक्षा) से छात्र हित में मांग की है कि शिक्षा बोर्ड का लंबित भुगतान 15 फरवरी से पहले सुनिश्चित करें, ताकि मार्च में संचालित की जाने वाली वार्षिक परीक्षाओं व कक्षा नौवीं व दसवीं की पुस्तकों के वितरण में किसी भी प्रकार का विलंब न हो व परीक्षा परिणाम घोषित करने में कोई दिक्कत न आ सकें।


