आवाज़ जनादेश / न्यूज़ ब्यूरो शिमला
हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम की खराब पड़ी इलेक्ट्रिक बसों को ठीक करने का काम शुरू हो गया है। लंबे समय के बाद एचआरटीसी प्रबंधन ने इसके लिए करार किया है, जिसके बाद बसों को ठीक किया जा रहा है। निगम के पास ऐसी 16 इलेक्ट्रिक बसें थीं जो कि खराब पड़ी थीं और इनके लिए यहां पर सामान नहीं मिल पा रहा था। यहां बता दें कि जब एचआरटीसी ने यह बसें खरीदी थीं तो टेंडर में वार्षिक मेंटेनेंस की शर्त नहीं रखी थी और यही वजह है कि जब बसें खराब हुर्ई, तो इनको ठीक करने के लिए सामान तक नहीं मिला। अब भविष्य में जिन इलेक्ट्रिक बसों की खरीद यहां पर की जाएगी उनके लिए वार्षिक मेंटेनेंस की शर्त को भी शामिल किया जा रहा है।
बताया जाता है कि पिछले कई महीनों से एचआरटीसी की 15 इलेक्ट्रिक बसें खराब पड़ी हुई थीं। सडक़ों के किनारे ये बसें धूल फांक रही थी। इलेक्ट्रॉनिक फॉल्ट आने के चलते इसका जो सामान था वह भारत में नहीं मिल रहा था। चीन से यह सामान मंगवाना पड़ा। इसके आने में काफी समय लग गया। अभी भी 15 में से आठ बसें ही रिपेयर करवाई जा सकती हैं और शेष बसों का सामान मंगवाया गया है जो अभी खराब पड़ी हुई हैं। सरकार एचआरटीसी को 327 इलेक्ट्रिक बसें देने जा रही है, जिसका टेंडर हो चुका है और अब केवल काम अवॉर्ड किया जाना है। इसकी खरीद की प्रक्रिया चली हुई है। इलेक्ट्रिक बसों के एमसीयू, थ्रस्ट रॉड, टायर रॉड और बैटरियों के ज्यादा खराब होने की शिकायतें आती है।
इलेक्ट्रिक बस की कीमत दो-तीन साल में पूरी
यहां बता दें कि इलेक्ट्रिक बसों के आने से एचआरटीसी को फायदा भी मिला है। भले ही इसकी कीमत काफी ज्यादा है, लेकिन दो-तीन साल में इसकी कीमत पूरी हो जाती है और इससे एचआरटीसी का मुनाफा होता है। अब क्योंकि जो पुरानी इलेक्ट्रिक बसें चल रही हैं, वो मुनाफे में आनी शुरू हो चुकी है। ऐसे में भविष्य में एचआरटीसी अपने बेड़े में इलेक्ट्रिक बसों को ही शामिल करना चाहता है, जिसके लिए सरकार भी उसका सहयोग कर रही है। मगर नई बसों को लेने की प्रक्रिया में काफी ज्यादा देरी हो चुकी है। उम्मीद है कि जल्द ही एचआरटीसी इन बसों की खरीद के लिए काम अवार्ड कर देगा।


