आवाज़ जनादेश / न्यूज़ ब्यूरो शिमला
जिन किसानों ने अभी गेहूं की बिजाई करनी है, वे गेहूं के बीज को बैवस्टिन 2.5 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज अथवा रैक्सिल 1ग्राम/1 किलोग्राम से उपचारित करने के बाद ही गेहूं की बिजाई करें। बीज का उपचार करने से गेहूं की खुली कांगियारी तथा हिल बंट आदि रोगों से बचाव होता है। जिन क्षेत्रों में दीमक की समस्या हो, वहां पर दो लीटर क्लोरोपाइरीफॉस 20 ईसी को 25 किग्रा. रेत में मिला कर प्रति हैक्टेयर की दर से शाम को बिजाई के समय खेत में बिखेर दें।
गोभी प्रजाति की सब्जियों की पौध की रोपाई करने से पहले भूमि के अंदर रहने वाले कीटों जैसे कटुआ, सफेद सुंडी व लाल चींटी आदि की रोकथाम के लिए रोपाई के समय दो लीटर क्लोरोपाइरीफॉस 20 ईसी को 25 किलोग्राम रेत में मिलाकर प्रति हेक्टेयर की दर से क्यारियों में डालें।
पौध को कमरतोड़ व जड़ गलन रोग से बचाने के लिए इंडोफिल एम.45 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी और वैवस्टिन एक ग्रा. प्रति लीटर पानी के मिश्रित घोल से क्यारियों को सींचे। गोभी व अन्य सब्जियों में तेले के नियंत्रण हेतु रोगर या डायमेथोएट व पत्ते खाने वाली सुंडियों के नियंत्रण के लिए मैलाथियान नामक दवाई एक मिली लीटर प्रति लीटर पानी का छिडक़ाव करें।
पशुओं को पिलाएं गुनगुना पानी
जानवरों को ठंड से बचाने के लिए उचित उपाय करें तथा पशुओं को पीने के लिए साफ गुनगुना पानी दें। पशुओं को नमक घटाएं और आवश्यक खनिज मिश्रण उचित मात्रा में चारे में मिलाकर दें।
ठंड में पनपने वाले संक्रामक रोगों से करें बचाव
दिसंबर में मैदानी और पहाड़ी क्षेत्रों में ठंड के कारण पशुओं की प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है। इसलिए पशुपालक इस मौसम में ठंड से बचाव से संबंधित प्रबंधन कार्य सुनिश्चित करें। तापमान में गिरावट होने के कारण पशुओं में कई प्रकार की बीमारियां सामने आती हैं, जिनमें से कुछ अति संक्रामक रोग पशुओं के लिए घातक साबित होते हैं और किसानों को इन बीमारियों के कारण भारी नुकसान उठाना पड़ता है। पशुओं को संक्रामक रोगों से बचाव के लिए उनका टीकाकरण पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार अवश्य करवाएं।


