आवाज जनादेश / न्यूज ब्यूरो शिमला
हिमाचल प्रदेश में हाइड्रो पावर जनरेशन के लिए नए प्रोजेक्टों के आने का सिलसिला बंद हो गया है। ऐसे में सुक्खू सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र की नब्ज को पहचानते हुए सौर ऊर्जा उत्पादन की ओर ध्यान दिया है। इस क्षेत्र को बढ़ाने के लिए सरकार की यह बेहतरीन सोच है क्योंकि बाजार में अब हाइड्रो पावर को वह कीमत नहीं मिल रही जो सोलर को मिल रही है। सौर ऊर्जा का उत्पादन करके राज्य प्रगति करने लगे हैं और कुछ इसी सोच के साथ प्रदेश की सुक्खू सरकार भी आगे बढ़ रही है। ऐसा नहीं है कि राज्य के पास हाइड्रो पावर के प्रोजेक्ट नहीं है। यहां अभी भी 25 से ज्यादा बड़े प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में पड़े हैं, क्योंकि इस क्षेत्र में कोई भी कंपनी आगे नहीं आ रही है और करीब पांच साल से मामला ठंडा पड़ा हुआ है लिहाजा इस सरकार ने इसके विकल्पों पर काम किया है। दो विकल्प हैं जिसमें सौर ऊर्जा प्रमुख है और इसके बाद दूसरा विकल्प पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट हैं जिनके लिए भी सरकार के पास आवेदन आ चुके हैं।
बड़े पैमाने पर यहां पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट लगाए जाने की संभावनाएं हैं जिनके लिए सुक्खू सरकार पिछली सरकार की पॉलिसी में बदलाव करने जा रही है। इसका खाका लगभग तैयार हो चुका है। सरकार के पास पंप स्टोरेज के 27 प्रोजेक्टों के आवेदन हैं जिनमें केंद्रीय उपक्रमों ने कई सारे प्रोजेक्ट यहां पर मांगे हैं। इनमें बीबीएमबी ने सबसे अधिक प्रोजेक्ट मांगे हुए हैं जिनके लिए आवेदन सरकार को आ चुके हैं। सौर ऊर्जा परियोजनाओं की बात करें तो सरकार ने अपनी सरकारी एजेंसी पावर कारपोरेशन को इस दिशा में आगे बढ़ाया है। प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों में सर्वेक्षण चल रहा है और जहां-जहां पर भी संभावनाएं हैं वहां पर सरकार खुद सोलर प्रोजेक्ट लगाएगी। इसकी शुरुआत ऊना जिला से की गई है जहां पर पावर कारपोरेशन ने पेखूवेला नामक 32 मैगावाट का प्रोजेक्ट तैयार करके शुरू कर दिया है। अब यहां से कमाई भी होने लगी है। एचडीएम
पाइपलाइन में सात प्रोजेक्ट
अभी सात प्रोजेक्ट पाइपलाइन में हैं जो कि नालागढ़ और ऊना क्षेत्रों में बनने हैं। इसके बाद हमीरपुर, कांगड़ा व मंडी जिला में भी संभावनाएं देखी जा रही हैं जहां पर सौर ऊर्जा का उत्पादन हो सकता है। वहीं सोलन जिला में भी इस तरह की परियोजनाएं लग सकती हैं।
बड़ी राहत मिलने की उम्मीद
सुक्खू सरकार ने सत्ता में आने के बाद साफ कर दिया कि एसजेवीएन व एनटीपीसी को दिए गए प्रोजेक्ट जो पूर्व सरकार ने दिए थे उनसे हिमाचल को फायदा नहीं मिलेगा। पिछले दो साल से सरकार इसमें लड़ाई लड़ रही है और इसमें जीत होती है तो प्रदेश को कहीं ज्यादा फायदा मिलेगा। यहां पर लूहरी, सुन्नी डैम व धौलासिद्ध, एसजेवीएनएल के तीन ऐसे प्रोजेक्ट हैं जिनको लेकर विवाद चल रहा है। इसमें वर्तमान सरकार चाहती है कि मुफ्त बिजली की हिस्सेदारी बढ़े परंतु मामला अदालत में चला गया है। सरकार को राहत मिली तो बड़ी राहत मिल जाएगी। ऐसा ही विवादित मामला भरमौर के टिडोंग परियोजना का है जो कि एनटीपीसी का है।
परियोजनाओं पर फोकस
बिजली बोर्ड के माध्यम से ऊहल परियोजना का निर्माण करने पर सरकार ने जोर दिया है और माना जा रहा है कि जनवरी महीने तक वह भी उत्पादन में आ जाएगा। इससे अलग पावर कारपोरेशन का काशंग प्रोजेक्ट उत्पादन में आ गया है और पावर कारपोरेशन सरकार का कमाऊपूत बन गया है। पावर कारपोरेशन ने अपने चार प्रोजेक्टों से कमाई शुरू कर दी है जिससे सरकार को राहत मिली है। भविष्य में सौर ऊर्जा और पंप स्टोरेज प्रोजेक्टों पर फोकस करके सरकार ऊर्जा क्षेत्र को ऊंचाइयों तक पहुंचा देगी क्योंकि इस दिशा में सरकार की योजनाएं चल रही हैं।
जनता को दी जा रही सबसिडी
सौर ऊर्जा की बात करें तो सरकार ने इसमें फोकस कर रखा है। यहां पर आज जनता को सोलर प्रोजेक्ट लगाने के लिए सरकार सबसिडी भी दे रही है। 150 के करीब आवेदन सरकार के पास हैं और 40 से ज्यादा लोगों को हिमऊर्जा के माध्यम से प्लांट दिए गए हैं। लोगों के पास खाली जमीन है तो वह अपने यहां पर सौर ऊर्जा की परियोजना लगा सकते हैं जिसके लिए सरकार ने विशेष योजना बना रखी है।
कमाई का बड़ा हथियार
ऊर्जा क्षेत्र की बात करें तो इस सरकार ने बिजली से कमाई को बड़ा हथियार बनाया है। पिछले साल सरकारी हिस्से की जो बिजली 1200 करोड़ रुपए से 1400 करोड़ रुपए तक बिकी है उसके लिए इस साल में 2100 करोड़ रुपए का टारगेट है और इस साल में अभी तक सरकार 1550 करोड़ रुपए की बिजली बेच भी चुकी है।
प्रदेशभर में ट्रांसमिशन स्टेशन स्थापित
सरकार ने अपने दो साल के कार्यकाल में उत्पादित बिजली को ट्रांसमिट करने पर भी ध्यान दिया है। ट्रांसमिशन कारपोरेशन के माध्यम से कई बड़े ट्रांसमिशन स्टेशन प्रदेश में स्थापित हो गए हैं और कई अभी होने हैं। प्रदेश में बड़ी ट्रांसमिशन लाइनें बन रही हैं जिनसे निजी कंपनियों को भी फायदा मिलेगा।


