डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री बोले, एचआरटीसी पहले खरीेदेगा 250 डीजल बसें
आवाज जनादेश / न्यूज ब्यूरो शिमला
उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि 327 इलेक्ट्रिक बसों की खरीद को लेकर प्रदेश सरकार ने राशि जारी कर दी है। इन बसों की खरीद को लेकर टेंडर प्रकिया चल रही है। वहीं, एचआरटीसी में 250 और नई डीजल बसें खरीदी जाएंगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के दूरदराज के क्षेत्र में डीजल बसों की डिमांड आ रही है और इलेक्ट्रिक बसों को बनने के लिए समय अधिक लग रहा है। ऐसे में 250 डीजल बसें ली जा रही हैं, जो 32 और 36 सीटर होंगी। उपमुख्यमंत्री शिमला के आशियाना में प्रेस वार्ता को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि 100 टैम्पो ट्रैवलर खरीदे जाएंगे। ये टैम्पो ट्रैवलर लांग रूटों पर भी चलेंगे। इसके अतिरिक्त 24 वोल्वो बसों का सारा फ्लीट बदला जा रहा है। इसके लिए टेंंडर प्रकिया शुरू कर दी है। सारी वोल्वो बसें नई आ रही हैं। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि निगम एक और सुविधा देने जा रहा है।
इसमें एचआरटीसी बस को यात्री रेल व हवाई यात्रा की तरह बसों को टै्रक कर सकेंगे, ताकि यात्रियों को पता चल सके कि निगम की बस कौन से स्टेशन पर पहुुंची और यात्री के स्टेशन पर कब तक पहुंचेगी? उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सोशल मीडिया पर परिवहन निगम को लेकर अफवाहें फैलाई जा रही हैं। बसों में देवी देवताओं की फोटो को हटाने के कोई निर्देश नहीं दिए गए हैं। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्रिहोत्री ने कहा कि यह देवभूमि हिमाचल है और एचआरटीसी देव दर्शन स्कीम के तहत प्रदेश भर मंदिरों को बसें चला रहा है, तो यह कैसे हो सकता है कि देवी देवताओं की फोटो हटाई जाए। इसी तरह सवारी के सामान का किराया लगाए जाने के बारे में भी दुष्प्रचार विपक्ष कर रहा है।
भानुपल्ली-बिलासपुर रेललाइन को केंद्र ही निपटाए
उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि भानुपल्ली-बिलासपुर-बेरी रेललाइन मामले में राज्य सरकार ने केंद्र से आग्रह किया कि बिलासपुर से आगे प्रस्तावित रेललाइन को डिफेंस प्रोजेक्ट घोषित किया जाए। इसकी शत-प्रतिशत फंडिंग केंद्र सरकार करे। जब यह परियोजना प्रस्तावित की गई थी, तो इसकी लागत 1047 करोड़ थी। इसमें 75 प्रतिशत हिस्सा केंद्र व 25 प्रतिशत की हिस्सेदारी राज्य सरकार की थी। इस पर नई शर्त लगाई गई कि 70 करोड़ से ज्यादा जहां भू अधिग्रहण होगी, वह हिमाचल को देनी होगी। इससे इस परियोजना लागत 6753 करोड़ चली गई है। राज्य का हिस्सा भी 261 करोड़ से बढक़र 2583 करोड़ हो गया। रेललाइन को पूर्व सरकार ने 511 करोड़ और कांग्रेस सरकार ने 336 करोड़ की राशि दी है।


