Power Projects : तीन साल में उत्पादन में आईं 10 बिजली परियोजनाएं

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अक्तूबर में शुरू होगा ऊहल प्रोजेक्ट, निजी क्षेत्र में 339 मेगावाट का उत्पादन

आवाज जनादेश / न्यूज ब्यूरो शिमला

हिमाचल प्रदेश में हालांकि नए प्रोजेक्ट लेने के लिए कोई कंपनियां आगे नहीं आ रही हैं, परंतु जो प्रोजेक्ट सालों पहले यहां पर दिए गए थे, वे धीरे-धीरे उत्पादन में आने शुरू हो गए हैं। निजी क्षेत्र में तीन साल में 10 नई परियोजनाएं उत्पादन में आई हैं। राज्य में 24 हजार मेगावाट से ज्यादा की बिजली क्षमता है, जिसमें से अभी 11 हजार मेगावाट के आसपास उत्पादन हो रहा है। सरकार के चिंता का कारण यह है कि नए प्रोजेक्टों के लिए कंपनियां नहीं आ रही हैं और पुराने कई ऐसे प्रोजेक्ट अधर में लटके हैं, जिनको समय पर मंजूरी नहीं मिल पा रही है। अब सरकार नीति में कुछ बदलाव करेगी और प्राइवेट डिवेलपर्ज को आकर्षित करेगी। राज्य में पिछले तीन साल की बात करें, तो यहां 10 परियोजनाएं निजी क्षेत्र में उत्पादन में आई हैं। इनसे सरकार को मुफ्त बिजली रॉयल्टी मिल रही है। अभी चंबा जिला में परियोजनाओं का इंतजार किया जा रहा है, जहां पर निजी क्षेत्र को रावी नदी में परियोजनाएं स्थापित करने को कई प्रोजेक्ट दिए गए हैं। जो प्रोजेक्ट यहां पर बनकर तैयार हो चुके हैं और उत्पादन में आ गए हैं, उनमें 19.8 मेगावाट का चांजू-दो प्रोजेक्ट है, जिसे पहले सरकारी क्षेत्र को दिया गया था, मगर बाद में इसे निजी हाथों में दे दिया गया।

इसके यूनिट एक व दो को शुरू कर दिया गया है, जो कि चंबा की रावी नदी पर है। इसी तरह से किन्नौर में 100 मेगावाट का सोरंग प्रोजेक्ट भी उत्पादन में आ गया है, जो कि सतलुज नदी पर है। इसकी भी दो यूनिट शुरू हो चुकी हैं। इसी तरह से करेड़ी परियोजना 4.80 मेगावाट की है, जो शिमला जिला में सतलुज नदी पर है। बजोली होली प्रोजेक्ट 180 मेगावाट का चंबा की रावी नदी में बना है, जिसके तीन यूनिट उत्पादन में आ गए हैं। वहीं, सतलुज पर 9.9 मेगावाट का रायपुर दो यूनिट के साथ शुरू हुआ है। मंडी में अनी पांच ेमेगावाट, कुल्लू में ब्यासकुंड टॉप 4.90 मेगावाट, कांगड़ा में ब्यास पर सेठू एक मेगावाट, किन्नौर में सात मेगावाट का सोलडन व चंबा में रावी नदी पर सात मेगावाट का होली टू प्रोजेक्ट शुरू हो चुके हैं। होली में दो यूनिट इस परियोजना के काम कर रहे हैं। इस तरह से 339.40 मेगावाट क्षमता की परियोजनाएं निजी क्षेत्र में शुरू हो गई है।

प्रदेश सरकार की बड़ी सफलता

हिमाचल सरकार की सबसे बड़ी सफलता ऊहल प्रोजेक्ट की होगी, जो अक्तूबर महीने तक उत्पादन में आ जाएगा। यह बहुप्रतिक्षित परियोजना है, जिसका कई साल से इंतजार किया जा रहा है। हालांकि इसकी बिजली का टैरिफ काफी ज्यादा होगा और शुरुआती सालों में इससे सरकार को कोई बड़ा फायदा नहीं मिलने वाला, मगर यहां पर उत्पादन जरूर बढ़ जाएगा। संभावनाएं हैं कि इस बार यह प्रोजेक्ट शुरू हो जाएगा, जिसके साथ कई विवाद जुड़े हैं।

35 प्रोजेक्ट को एनओसी नहीं

अभी प्रदेश में छोटे-बड़े दर्जनों ऐसे प्रोजेक्ट हैं, जिन पर काम नहीं हो पाया है। करीब 35 परियोजनाओं के मामले सरकार को आए हैं, जिनमें एनओसी नहीं मिल पा रही है। सरकार इनको नए सिरे से अलॉट करके दोबारा से समय देने की सोच रही है जिसपर कमेटी की रिपोर्ट मांगी गई है। निजी क्षेत्र में परियोजनाएं उत्पादन में आएं तो सरकार को भी इसका लाभ होगा, क्योंकि यहां पानी बह रहा है जिसका सदुपयोग हो यह सरकार चाहती है। मुख्यमंत्री ने खुद कहा है कि पानी हिमाचल की अमूल्य संपदा है, जिसका दोहन करके प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। इसीलिए सरकार ने वाटर सेस लगाने की कोशिश की थी, जिसमें अभी तक सफलता नहीं मिल पाई है।

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