हिमाचल में तकनीक और कल्याण पर फोकस: जी.सी. नेरवा और जी.डी.सी. चौपाल ने संयुक्त कार्यशाला का किया सफल आयोजन

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🏔️ हिमाचल में तकनीक और कल्याण पर फोकस: जी.सी. नेरवा और जी.डी.सी. चौपाल ने संयुक्त कार्यशाला का किया सफल आयोजन
मानव जीवन की गुणवत्ता सुधारने पर केंद्रित रही ‘Latest Technologies for Human Well-being’ कार्यशाला
(विशेष संवाददाता, शिमला)
शिमला, 31 अक्टूबर 2025: हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण अंचल में स्थित दो प्रमुख सरकारी शैक्षणिक संस्थानों—सरकारी कॉलेज नेरवा और सरकारी डिग्री कॉलेज चौपाल—ने संयुक्त रूप से “Latest Technologies for Human Well-being” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों और शिक्षकों को आधुनिक तकनीकों, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और मनोवैज्ञानिक उपकरणों के माध्यम से मानव कल्याण (Human Well-being) में सुधार के नवीनतम उपायों से परिचित कराना था।

तकनीक और मनोविज्ञान का समन्वय
कार्यशाला का संचालन जी.डी.सी. चौपाल के प्राचार्य डॉ. रविंद्र चौहान और जी.सी. नेरवा के प्राचार्य डॉ. एच. एल. शर्मा के कुशल नेतृत्व में किया गया। इस दौरान चौपाल कॉलेज की टीम (प्रो. कन्या नेगी, प्रो. प्रियंका ठाकुर, प्रो. बबिता, और प्रो. नेहा शर्मा) ने अपनी प्रस्तुतियों में स्पष्ट किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), बायोफीडबैक, न्यूरो-साइंस और आधुनिक डिजिटल उपकरण किस प्रकार स्वास्थ्य, शिक्षा और भावनात्मक संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
नेरवा कॉलेज की टीम, जिसका समन्वय प्रो. विकास सुमन ने किया, की सक्रिय भागीदारी के साथ छात्रों ने व्यावहारिक सत्रों और समूह चर्चाओं में हिस्सा लिया, जिससे उनकी वैज्ञानिक सोच और रचनात्मकता को बढ़ावा मिला।
डायग्नोस्टिक टूल्स और सुपरह्यूमन स्किल्स पर व्याख्यान
कार्यशाला के मुख्य वक्ता, सिस्टर निवेदिता नर्सिंग कॉलेज (IGMC शिमला) के विजिटिंग प्रोफेसर और प्रसिद्ध शिक्षा विशेषज्ञ डॉ. बी. एस. चौहान रहे। उन्होंने चिकित्सा और मनोविज्ञान के क्षेत्र में प्रयुक्त हो रही नवीनतम “Digital Diagnostic Tools” और “Neuro-psychological Mapping Systems” का विस्तृत परिचय दिया।
डॉ. चौहान ने अपने इंटरैक्टिव सत्र में “Superhuman Skills” और “Success Principles of Life” पर ज़ोर दिया, जिसमें 15 छात्रों का लाइव डेमोंस्ट्रेशन भी शामिल था। उन्होंने बताया कि मस्तिष्क की छिपी हुई क्षमताओं को पहचान कर कोई भी व्यक्ति अपने करियर और जीवन में असाधारण सफलता प्राप्त कर सकता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि तकनीक का सार्थक उपयोग तभी है जब वह मानव कल्याण, मानसिक शांति और सामाजिक सद्भाव के लिए हो।
अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की घोषणा
कार्यशाला के अंत में एक महत्वपूर्ण घोषणा की गई। नवंबर 2025 में एक अंतरराष्ट्रीय बहु-विषयक सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। यह विशाल आयोजन सात महाविद्यालयों—जी.सी. नेरवा, जी.डी.सी. चौपाल, जी.डी.सी. कंधाघाट, जी.डी.सी. निर्मंड, जी.डी.सी. संगड़ाह, ठाकुर पी.जी. कॉलेज धलियारा—और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला के मनोविज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में होगा।
उपस्थित प्रतिभागियों ने ऐसे आयोजनों को ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों के युवाओं में तकनीकी जागरूकता और सकारात्मक जीवन दृष्टि विकसित करने के लिए अनिवार्य बताया। कार्यशाला का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि “मानव कल्याण के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी का समन्वय ही सच्चे विकास का मार्ग है।”

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