आवाज़ जनादेश
देश मे जी एस टी लागू करने के पीछे एक उद्देश्य यह भी था कि *सारे देश मे विभिन्न वस्तुओ पर एक समान टैक्स* वसूल किया जाए ताकि सारे देश मे विभिन्न वस्तुएं एक ही कीमत पर विक्रय हो सके। परन्तु *राज्य सरकारो के दबाव मे पेट्रोलियम प्रोडक्ट को जी एस टी की परिधि से बाहर* रखा गया और उस पर वैट तय करने का अधिकार यथावत राज्य सरकारो के पास ही बना रहा। आज विभिन्न राज्य सरकारे *पेट्रोलियम पदार्थों पर अलग अलग रेट से टैक्स* वसूल कर रही है जिसके चलते अलग-अलग प्रदेशों मे पेट्रोलियम प्रोडक्ट अलग अलग कीमत पर बेचे जा रहे हैं। आज मुम्बई मे पेट्रोल और डीजल क्रमश 80.79 व 71.31 रूपये लीटर है तो कोलकता मे 77.79 व 70.38 रूपये प्रति लीटर बिक रहा है। इस प्रकार *वन नेशन वन टैक्स की परिकल्पना अधूरी* है। इसके अतिरिक्त पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतो मे *जाते वर्ष मे जबरदस्त उछाल* हुआ है। 2019 मे पैट्रोल 6.30,डीजल 5.30 रूपये महंगा हुआ है। आज तीन चार वर्ष पूर्व केंद्रीय सरकार पेट्रोलियम पदार्थों की कीमते नियंत्रित करती थी और जब भी इनकी कीमतो मे बढौतरी होती थी तो खूब आलोचना होती थी। सरकार ने *दो काम* किए –
(1) *कीमतो का निर्धारण अतंराष्ट्रीय बाजार के साथ* जोड़ दिया और इसे प्रशासनिक निंयत्रण से भी बाहर कर दिया
(2) कीमतें रोजाना अंतर्राष्ट्रीय कीमतों के आधार पर तय होने लगी।अब बढौतरी धीरे धीरे होने लगी और वह नजर नही आती थी। इससे सरकार *कीमत बढने की जिम्मेदारी और आलोचना* से बच गई। परन्तु साल मे हुई बढौतरी को देखा जाए तो *यह बडी बढौतरी* है। इसमे *केंद्रीय एक्साइज ड्यूटी भी शामिल* है जो उस समय लगाई गई थी जब अंतराष्ट्रीय बाजर मे पेट्रोलियम प्रोडक्ट की कीमते लगातार गिर रही थी। अब जब *भाव आसमान छू रहे है* तो सरकार को एक्साइज ड्यूटी मे रियायत देनी चाहिए और सारे भारत मे पेट्रोलियम प्रोडक्ट एक कीमत मे उपलब्ध हो उसके लिए *पेट्रोलियम पदार्थों को जी एस टी के दायरे मे लाना चाहिए।* स्मरण रहे यदि पेट्रोल और विशेषकर डीजल महंगा होगा तो उसका *असर हर चीज पर* पड़ता है और हर तरह की महंगाई बढती है। आज इतना ही *कल फिर नई कड़ी के साथ मिलेंगे।
वन नेशन वन टैक्स
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