हिमाचल में फसल विविधिकरण को बढ़ावा देने के उददेश्य से आरम्भ हि.प्र. फसल विविधिकरण प्रोत्साहन योजना ‘जाईका’ किसानों की आय बढ़ाने तथा कृषि गतिविधियों में विविधता लाने में वरदान सिद्ध हुई है।राष्ट्रीय कृषि विस्तार प्रबन्धन संस्थान तथा भारत सरकार के कृषि किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा इस परियोजना के प्रभावों पर किए गए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि जाईका ने परियोजना क्षेत्र में फसलों की पैदावार और किसानों की आय बढ़ाने में सकारात्मक प्रभाव डाला है।जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (जाईका) द्वारा वित्त पोषित 321 करोड़ रुपये की इस परियोजना को पहले चरण में पांच ज़िलों बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, मंडी और ऊना में लागू किया गया।इस परियोजना का उद्देश्य किसानों को सब्जी एवं अनाज उगाने और कटाई के बाद की प्रबंधन तकनीक के बारे प्रशिक्षण के साथ-साथ सिंचाई और खेतों तक सड़क सुविधाओं जैसी मूलभूत अधोसंरचना का विकास करना है। हिमाचल प्रदेश कृषि विकास सोसाइटी (एचपीएडीएस) जाईका की कार्यान्वयन एजेंसी है। यह परियोजना किसानों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार के उद्देश्य से बनाई गई है।प्रधान सचिव (कृषि ) ओंकार शर्मा ने जाईका के प्रथम चरण की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए जानकारी दी कि वर्ष 2011 से 2018 तक चली इस परियोजना की सफलता को देखते हुए, इसे 2020 तक बढ़ा दिया गया है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने इसके 1104 करोड़ रुपये के दूसरे चरण को भी सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान कर दी है। इस परियोजना को अब प्रदेश के सभी जिलों में लागू किया जाएगा। परियोजना के प्रभावां पर किए गए अध्ययन के अनुसार परियोजना के सफल क्रियान्वयन से पांचों ज़िलों में सुखद परिणाम आए हैं, जिससे हिमाचल में फसल विविधिकरण के परिदृश्य में सुखद बदलाव आए हैं। परियोजना के माध्यम से सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने के बाद किसानों ने अनाज से सब्जी उत्पादन की ओर रूख किया है। परियोजना क्षेत्र में तकनीकी सहायता, प्रौद्योगिकी के सम्बन्ध में दिए गए प्रशिक्षण से सभी फसलों के उत्पादन में वृद्धि दर्ज की गई है। इस अध्ययन के माध्यम से यह जानकारी भी उपलब्ध हुई है कि परियोजना क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाले क्षेत्रों की औसत कृषि आय में लगभग चार गुना की वृद्धि हुई है जो कि परियोजना की सफलता को दर्शाती है। इन उत्साहवर्द्धक परिणामों तथा ग्रामीणों के जीवन में आए बदलाव को देखते हुए जाईका ने प्रदेश के लिए परियोजना के दूसरे चरण को अपनी सहमति जताई है।ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि विकास एवं कृषकों की आय को बढ़ाने तथा मौजूदा कृषि योग्य क्षेत्र की उत्पादकता को बढ़ाना आवश्यक है जो कि आत्म-निर्वाह फसलों को उगाने के बजाय पहाड़ी व ऊंचाई पर स्थित क्षेत्रों में नकदी फसलों जैसे सब्जियों के उत्पादन जैसे विविध कृषि उत्पादन के प्रयासों से संभव है।अध्ययन में यह भी तथ्य सामने आए हैं कि रबी के मौसम में उगाई जाने वाली सब्जियों के अन्तर्गत क्षेत्र में 232 प्रतिशत की वृद्धि जबकि खरीफ के दौरान लगाई जाने वाली सब्जियों के क्षेत्र के अन्तर्गत 328 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यही नहीं परियोजना के अंतर्गत सिंचाई एवं अन्य प्रयासों के फलस्वरूप खरीफ और रबी के दौरान उगाई जाने वाली सब्जियों की उपज में 108 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है जो कि एक उपलब्धि है।
कृषकों की आर्थिकी में सुधार लाने में उत्प्रेरक बनी ‘जाईका’ परियोजना
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